
पाकिस्तान के नए आर्मी चीफ़ आसिम मुनीर भारत पर क्या सोचते हैं?: दिन भर, 24 नवंबर
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आसिम मुनीर की नियुक्ति से पाकिस्तान में क्या स्टेबिलिटी आएगी, इलेक्शन कमीशन पर क्या तय कर सकता है सुप्रीम कोर्ट, चीन में बढ़ते कोविड मामलें क्या भारत के लिए ख़तरे की आहट हैं और कल के IND-NZ ODI मैच में किस पर होगी नज़र, सुनिए 'दिन भर' में.
अब इमरान का क्या होगा?
किसी लोकतंत्र में आर्मी चीफ कौन बना, किस का पत्ता कटा. वैसे तो ये सामान्य सी ख़बर होनी चाहिए लेकिन पाकिस्तान में ये बड़ी बात होती है. क्योंकि हमारे साथ ही आज़ाद हुआ पाकिस्तान, पिछले 75 बरस में 36 बरस मिलिट्री शासन में रहा. यहां मिलिट्री का मुखिया बहुत कुछ तय करता है, कुछ लोग तो यहां तक कहते हैं कि सरकार भी वही बनाते, बिगाड़ते हैं. क्या आने वाले समय ये धारणा और मजबूत होगी या ध्वस्त हो जाएगी, ये आसिम मुनीर तय करेंगे.
मौजूदा आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा का कार्यकाल 29 नवंबर को समाप्त हो रहा है तो अगला आर्मी चीफ इमरान खान की पसन्द का होगा या शहबाज शरीफ का फिर रिटायरिंग चीफ बाजवा का. इसको लेकर बहुत स्पेकुलेशन्स थे. उन पर आज फुल स्टॉप लगा. पाकिस्तान की सूचना और प्रसारण मंत्री हैं मरियम औरंगजेब. उन्होंने ऐलान किया कि जनरल साहिर शमशाद मिर्जा, जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन होंगे और लेफ्टिनेंट जनरल सैयद आसिम मुनीर, आर्मी चीफ. अब महज़ औपचारिकता है बची है उस मुहर की जो एक दो दिन में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी लगा देंगे.
किस तरह का कार्यकाल रहा है आसीम मुनीर का, क्या सीनियोरिटी के बेसिस पर उनका चयन हुआ है और मौजूदा राजनीतिक अस्थिरता के बीच इनका सलेक्शन कैसा है? जनरल आसीम मुनीर की नियुक्ति से भारत - पाकिस्तान सम्बन्धों में क्या कुछ बदलाव होगा या बाजवा डॉक्ट्रिन ही के हिसाब से चीज़ें चलेंगी आगे? इमरान खान का क्या भविष्य नज़र आता है यहां से अब आगे? 'दिन भर' में सुनने के लिए नीचे क्लिक करें.
इलेक्शन कमिश्नर पर SC की खरी-खरी!
इलेक्शन कमीशन और कमिशनर कितना इंडिपेंडेंट है, उसकी नियुक्ति कैसे होगी या होती है, इसके आस पास एक सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई हुई, लगातार चार दिन तक. आज उसमें कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया. जस्टिस केएम जोसफ की अध्यक्षता में जस्टिस अजय रस्तोगी, जस्टिस अनिरुद्ध बोस, जस्टिस हृषिकेश रॉय और जस्टिस सीटी रविकुमार की फाइव बेंच संविधान पीठ ये सुनवाई कर रही थी. कोर्ट ने कुछ बेहद तल्ख़ टिप्पणियां की थीं जिस बारे में कल हमने बताया था. आज कोर्ट ने सभी स्टेकहोल्डर्स को लिखित दलीलें देने के लिए 5 दिनों की मोहलत दी. और क्या कुछ हुआ आज कोर्ट में, सरकार की ओर से कोर्ट की तल्ख़ टिप्पणियों पर क्या कहा गया, इलेक्शन कमिश्नर अरुण गोयल की नियुक्ति की फाइल कोर्ट ने मंगवाई है, कोर्ट क्या इस पर भी कुछ तय करेगा क्योंकि एक तर्क ये है कि ये सरकार का काम है, ज्यूडिशियरी का नहीं. 'दिन भर' में सुनने के लिए यहां क्लिक करें.

कोर्ट ने पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली बनाने पर जोर दिया ताकि बिना नसबंदी वाले कुत्तों की रिपोर्टिंग हो सके. 28 जनवरी को सरकारों की ओर से सॉलिसिटर जनरल अपनी दलीलें प्रस्तुत करेंगे. कोर्ट ने एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट के पॉडकास्ट पर नाराजगी जताई और मामले की गंभीरता को रेखांकित किया. ये सुनवाई आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को जाति के आधार पर अपमानित करने की स्पष्ट मंशा होनी चाहिए। पटना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एफआईआर और आरोप पत्र में जाति-आधारित अपमान के अभाव को रेखांकित किया। कोर्ट ने एससी एसटी एक्ट की धारा 3(1) के प्रावधानों को दोहराते हुए कहा कि केवल अपशब्दों का प्रयोग अपराध नहीं बनता।

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