
पांच हजार किसान, 203 KM का पैदल मार्च... जानें सड़क पर क्यों उतरे इस राज्य के 'अन्नदाता'
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मंगलवार को करीब 5 हजार किसानों ने उत्तरी महाराष्ट्र के नासिक जिले से तमाम मांगों को लेकर पैदाल मार्च शुरू किया. इनमें ज्यादातर किसान आदिवासी बेल्ट से हैं जो वन भूमि अधिकार और अन्य किसान संबंधित मुद्दों पर राहत की मांग कर रहे हैं. ये मार्च नासिक जिले के डिंडोरी से शुरू हुआ और मुंबई तक लगभग 203 किमी की दूरी तय करेगा. किसानों का मार्च शुक्रवार रात तक मुंबई पहुंचेगा.
महाराष्ट्र में एक बार फिर किसानों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. हजारों की संख्या में किसान मुंबई कूच करने के लिए पैदल मार्च रहे हैं. इस बीच सरकार ने किसानों से बातचीत कर उनकी समस्या सुनने के लिए मंत्री दादा भुसे और अतुल सावे को जिम्मा सौंपा है. दोनों मंत्री जाकर किसानों से मिलेंगे और उनकी समस्याओं को लेकर चर्चा करेंगे.
दरअसल, करीब 5 हजार किसानों ने मंगलवार को उत्तरी महाराष्ट्र के नासिक जिले से तमाम मांगों को लेकर पैदाल मार्च शुरू किया. इनमें ज्यादातर किसान आदिवासी बेल्ट से हैं जो वन भूमि अधिकार और अन्य किसान संबंधित मुद्दों पर राहत की मांग कर रहे हैं.
इन मांगों में प्याज उत्पादकों को 600 रुपये प्रति क्विंटल की तत्काल वित्तीय राहत, 12 घंटे के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति और कृषि लोन माफ करना आदि शामिल है. ये मार्च नासिक जिले के डिंडोरी से शुरू हुआ और मुंबई तक लगभग 203 किमी की दूरी तय करेगा. किसानों का मार्च शुक्रवार रात तक मुंबई पहुंचेगा.
यह पहली बार नहीं है जब किसान अपनी समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए मुंबई की ओर पैदल मार्च कर रहे हैं. पांच साल पहले भी उन्होंने ऐसा ही मार्च निकाला था. तब सरकार ने कहा था कि उनकी मांगें पूरी की जाएंगी, लेकिन सरकार ने अभी तक कुछ ही मांगें मानी हैं. अब इसको लेकर फिर किसान आंदोलन कर रहे हैं.
गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार को उन प्याज किसानों को 300 रुपये प्रति क्विंटल की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की, जो प्याज की कीमतों में भारी गिरावट से बुरी तरह प्रभावित हैं. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में इसकी घोषणा की थी और कहा था कि इससे प्याज उत्पादकों को राहत मिलेगी. हालांकि किसान इस घोषणा से नाखुश नजर आ रहे हैं.
विरोध को लेकर कानून व्यवस्था सख्त

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