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पब्लिक नहीं, मशीन पूछे सवाल और नेता नहीं मशीन ही दे जवाब... क्या AI लोकतंत्र के लिए अच्छा है?
Zee News
इस समय एआई का दायरा तेजी से बढ़ रहा है. पढ़ाई-लिखाई से लेकर नौकरियों में भी एआई घुसपैठ कर चुका है. हालांकि टेक एक्सपर्ट और प्रबुद्ध लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि एआई लोकतांत्रिक देशों में अपनी अलग भूमिका निभा सकता है जो नागरिकों के लिहाज से अच्छी स्थिति नहीं होगी.
कल्पना कीजिए कि एआई अपने जन प्रतिनिधि या अफसर से सवाल पूछ रहा है और उधर से भी एआई ही जवाब दे रहा है. क्या लोकतांत्रिक देश में ऐसी कल्पना की जा सकती है? अगर ऐसा होता है तो क्या यह अच्छी स्थिति होगी? ऐसे समय में जब भारत की राजधानी दिल्ली में एआई समिट के लिए दुनियाभर के नेता और एक्सपर्ट जुटे हैं, यह सवाल भी पूछा जाना चाहिए या पूछा जा रहा है कि क्या एआई सच में लोकतंत्र के लिए अच्छा है? ' टेक एक्सपर्ट ब्रुस शीनर और डेटा साइंटिस्ट नाथन सैंडर्स ने एक लेख में इस सवाल पर विस्तार से बात की है. उन्होंने सवाल उठाया है कि सरकार की तरफ से एआई का किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. शायद भारत के लोग यह जानकर चौंक जाएं कि हो सकता है आने वाले समय में नीतियों की बात चले और असल में ये चर्चा एआई बॉट के बीच हो रही हो. उन्होंने अमेरिका का उदाहरण देते हुए कई चौंकाने वाली बात साझा की है.
वे लिखते हैं कि नेता आजकल अमेरिका और चीन के बीच टेक्नोलॉजी में सबसे आगे रहने की ग्लोबल रेस को तवज्जो दे रहे हैं. वे चिप एक्सपोर्ट, हर देश के लेटेस्ट मॉडल रिलीज और AI के मिलिट्री इस्तेमाल के जियोपॉलिटिकल असर पर डिबेट कर रहे हैं. उन्हें लगता है कि किसी दिन हम AI में हुई तरक्की को किसी सुपरपावर वॉर में जीतते हुए देख सकते हैं जबकि 21वीं सदी के जरूरी हथियारों की रेस पहले से ही कहीं और चल रही है. AI निश्चित रूप से एक पसंदीदा हथियार है और उसके लड़ाके दर्जनों डोमेन में फैल गए हैं.
रिसर्च में एआई घुस चुका है
- हां, एकेडमिक जर्नल AI से तैयार पेपरों से भरे पड़े हैं और सबमिशन को रिव्यू करने में मदद के लिए भी AI का इस्तेमाल हो रहा है.
- ब्राजील के कोर्ट सिस्टम में AI का इस्तेमाल शुरू हो गया क्योंकि AI की मदद से फाइल किए गए केस की संख्या बढ़ने लगी थी. आपको याद होगा कुछ घंटे पहले अपने देश में भी अखबारों में एक खबर छपी थी कि एआई की मदद से याचिकाएं तैयार हो रही हैं.

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