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कौन है भारत के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बादशाह, किसके पास है कंट्रोल? समिट से पहले जानें सच्चाई
Zee News
भारत की AI ग्रोथ काफी हद तक विदेशी चिप्स और प्राइवेट क्लाउड फर्मों पर निर्भर है, जिसमें सरकार का मालिकाना हक सीमित है. हालांकि कैपेसिटी बढ़ रही है, लेकिन ग्लोबल टेक पर निर्भरता और सेमीकंडक्टर की धीमी तरक्की कंट्रोल, लचीलेपन और असली टेक्नोलॉजिकल सॉवरेनिटी को लेकर चिंताएं बढ़ा रही है.
भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की महत्वाकांक्षाएं एक ऐसी नींव पर टिकी हैं जो सरकार की नहीं है, ऐसे हार्डवेयर से बनी है जिसे वह बना ही नहीं सकती और जिसे विदेशी टेक्नोलॉजी चलाने वाली प्राइवेट कंपनियां कंट्रोल करती हैं. इस सप्ताह भारत मंडपम में AI इम्पैक्ट समिट होने वाला है, तो जश्न की घोषणाओं के पीछे यह अजीब सच्चाई छिपी है. भारत में AI को चलाने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर को असल में कौन कंट्रोल करता है? जवाब है कॉर्पोरेट. मिनिस्ट्री ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड IT ने मई 2025 में इस बात का ऐलान किया कि भारत की 'नेशनल कंप्यूट कैपेसिटी 34,000 GPU को पार कर गई है'. सही-सही कहें तो 34,333 यूनिट, जो इंडियाAI मिशन के ओरिजिनल 10,000- GPU टारगेट से तीन गुना से भी ज़्यादा है.
उस पूल में हर एक GPU विदेशी सिलिकॉन है. NVIDIA H100 और L40S एक्सेलरेटर, AMD चिप्स, गूगल TPUs ये सभी इम्पोर्टेड हैं और सभी विदेशी एक्सपोर्ट कंट्रोल और जियोपॉलिटिकल कैलकुलेशन के तहत हैं जो रातों-रात बदल सकते हैं. ऐसे नेशनल कैपेसिटी का आधे से ज़्यादा को एक ही प्राइवेट कंपनी कंट्रोल करती है. इस कंपनी का नाम है योट्टा डेटा सर्विसेज़. योट्टा ने अपने पॉवर क्लाउड प्लेटफॉर्म के ज़रिए इंडिया AI मिशन को 9,216 एडवांस्ड GPU दिए हैं. कंपनी साफ़ तौर पर कहती है कि वह मिशन की GPU कैपेसिटी का 50% से ज़्यादा देगी, जो कमर्शियल कॉन्ट्रैक्ट के तहत फेज़ में दिया जाएगा, जिसे आम लोग नहीं पढ़ सकते. अगर योट्टा में टेक्निकल खराबी, फाइनेंशियल परेशानी या सप्लाई में रुकावट आती है, तो भारत का आधे से ज़्यादा AI कंप्यूटर बंद हो जाएगा. अगर U.S. की एक्सपोर्ट पॉलिसी बदलती है. चीन के मामले में ये बहुत ज़्यादा हुआ है ऐसे में तो भारत की GPU पाइपलाइन सोर्स पर ही कट सकती है.
मार्केटप्लेस की तरह काम करता है इंडिया AI कंप्यूटर पोर्टल सरकार इन्हें एम्पैनल्ड GPU कहती है यह एक ऐसा शब्द है जो ओनरशिप को छिपाता है. ये कोई सरकारी एसेट नहीं हैं. ये प्राइवेट सेक्टर की कैपेसिटी हैं जिन्हें कमर्शियल अरेंजमेंट के तहत इंडियाAI वर्कलोड के लिए मंज़ूरी मिली है. इंडिया AI कंप्यूटर पोर्टल एक मार्केटप्लेस की तरह काम करता है. रिसर्चर और स्टार्टअप प्लेटफॉर्म के ज़रिए इन GPU को एक्सेस करते हैं, लेकिन हार्डवेयर क्लाउड प्रोवाइडर का होता है जो इस्तेमाल के लिए बिल बनाते हैं. इस मॉडल ने सरकार के खुद डेटा सेंटर बनाए और बिना किसी तेज़ी से स्केलिंग की इजाज़त दी. लेकिन इसका मतलब यह भी है कि भारत की AI कैपेसिटी पूरी तरह से उन फर्मों के साथ कमर्शियल रिश्तों पर भी निर्भर करती है जिनकी मुख्य ज़िम्मेदारी शेयरहोल्डर के प्रति है, न कि नेशनल स्ट्रैटेजी के प्रति.
फिलहाल भारत के पास ऑपरेशनल सेम भारत ने 76,000 करोड़ रुपए का सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम शुरू किया है. 2026-27 के बजट में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के लिए 1,000 करोड़ रुपए का लक्ष्य शामिल हैं, जिसका टारगेट इक्विपमेंट प्रोडक्शन और सप्लाई-चेन डेवलपमेंट है, लेकिन बजट डॉक्यूमेंट्स से एग्जीक्यूशन में देरी का पता चलता है. सेमीकंडक्टर प्रोग्राम ने 2024-25 में 638.07 करोड़ रुपए खर्च किए, जबकि बजट अनुमान 6,903 करोड़ रुपयों का था यानी 9.2% यूटिलाइजेशन रेट. भारत में AI-क्लास चिप्स बनाने में सक्षम कोई भी ऑपरेशनल सेमीकंडक्टर फ़ैब मौजूद नहीं है. सरकार के अपने दस्तावेज़ दिखाते हैं कि ये प्रोग्राम अभी इंसेंटिव और प्रोजेक्ट-अप्रूवल फ़ेज़ में हैं, प्रोडक्शन में नहीं. उम्मीद के साथ भी घरेलू AI-ग्रेड चिप मैन्युफैक्चरिंग कटिंग-एज नोड्स से सालों, शायद दशकों दूर है.
टेबल पर बड़ी टेक कंपनियां समिट का इंस्टीट्यूशनल आर्किटेक्चर कॉर्पोरेट असर को और गहरा करता है. पार्टिसिपेंट्स की लिस्ट में Google, Microsoft, Meta, IBM, OpenAI, और DeepMind के साथ-साथ Infosys, TCS, Reliance, और Bharti जैसी बड़ी भारतीय कंपनियां शामिल हैं. ये कंपनियां AI पॉलिसी, स्टैंडर्ड और डिप्लॉयमेंट को आकार देने वाले मल्टी-स्टेकहोल्डर वर्किंग ग्रुप्स में शामिल हैं. वे क्लाउड प्लेटफ़ॉर्म, फ़ाउंडेशन मॉडल और डेवलपर टूल देती हैं जिनका इस्तेमाल ज़्यादातर भारतीय AI प्रैक्टिशनर करते हैं. कृषि मंत्रालय के डिजिटल कृषि मिशन में AI डिप्लॉयमेंट के लिए Cisco, Jio Platforms, ITC, और NCDEX के साथ MoU शामिल हैं - ये कीमती पार्टनरशिप हैं जो यह भी पक्का करती हैं कि कृषि AI कॉर्पोरेट चैनलों के ज़रिए आगे बढ़े.

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