
'नीतियां बदलनी होंगी...', प्रदूषण पर सोनिया गांधी ने सरकार को सुझाए ये उपाय
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दिल्ली-एनसीआर में गहराते प्रदूषण और स्मॉग के बीच कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने एक लेख में अरावली पर्वतमाला से लेकर वायु और जल प्रदूषण तक पर गहरी चिंता जताते हुए मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने अरावली को अवैध खनन से हो रहे नुकसान, 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों पर खनन को मिली छूट, और इसे माफियाओं के लिए खुला न्योता बताया है.
देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के राज्य भीषण प्रदूषण की चपेट में हैं. जहरीले स्मॉग की चादर ने महानगरों को ढक रखा है जो कम होने के बजाय लगातार गहरी होती जा रही है. सरकार की तमाम कोशिशें विफल साबित हो रही हैं और मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है. कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने भी एक लेख में प्रदूषण पर चिंता जताई है और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं.
'अरावली की पहाड़ियों के लिए सरकार ने साइन किया डेथ वारंट'
अपने लेख में सोनिया गांधी ने लिखा, 'अरावली पर्वतमाला, जो गुजरात से लेकर राजस्थान होते हुए हरियाणा तक फैली हुई है, भारतीय भूगोल और इतिहास में लंबे समय से एक अहम भूमिका निभाती रही है. यह थार रेगिस्तान को गंगा के मैदानों तक फैलने से रोकने वाली एक प्राकृतिक दीवार रही है. इसने चित्तौड़गढ़ और रणथंभौर जैसे राजस्थान के गौरवशाली किलों की रक्षा की है और उत्तर-पश्चिम भारत के कई समुदायों के लिए आध्यात्मिक केंद्र भी रही है.'
उन्होंने लिखा, 'अब मोदी सरकार ने इन पहाड़ियों के लिए लगभग एक तरह से 'डेथ वारंट' जारी कर दिया है, जो पहले से ही अवैध खनन के चलते काफी हद तक उजड़ चुकी हैं. सरकार ने यह घोषित कर दिया है कि अरावली की जिन पहाड़ियों की ऊंचाई 100 मीटर से कम है, उन पर खनन से जुड़े सख्त नियम लागू नहीं होंगे.'
सोनिया गांधी ने लिखा, 'सरकार का यह फैसला अवैध खनन करने वालों और माफियाओं के लिए खुला न्योता है, क्योंकि इससे पर्वतमाला का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा, जो सरकार की ओर से तय की गई ऊंचाई की सीमा से नीचे आता है, पूरी तरह बर्बाद किया जा सकता है.'
'स्मॉग की समस्या सार्वजनिक स्वास्थ्य त्रासदी'

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