
'नाम बताओ एक्शन हम लेंगे', 32 किताब, दो किरदार और केंद्र की सॉरी पर CJI की दो टूक
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सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का चैप्टर शामिल किए जाने पर सख्त रुख अपनाते हुए माफी स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने सरकार से कहा है कि किसने किया, नाम बताओ. हम कार्रवाई करेंगे.
एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा की किताब में 'न्यायपालिका में करप्शन' के बारे में अध्याय रखे जाने पर सर्वोच्च न्यायालय ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने एनसीईआरटी की ओर से माफी मांगे जाने की बात कही. इस पर सीजेआई ने दो टूक कहा कि नाम बताओ, एक्शन हम लेंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ कहा है कि हम इस मामले को बंद नहीं करेंगे. सीजेआई ने कहा कि इस मामले में न्यायिक दखल की सख्त जरूरत है. यह आलोचना को दबाने की इच्छा से नहीं, बल्कि शिक्षा की ईमानदारी बनाए रखने के लिए है. जब छात्र सार्वजनिक जीवन और संस्थागत ढांचे की बारीकियों को समझना शुरू करते हैं, तो इस उम्र में उन्हें एकतरफा बातों के सामने लाना गलत है.
सीजेआई ने कहा कि इससे बुनियादी गलतफहमियां पैदा होती हैं और इस तरह वे उस जिम्मेदारी को समझने से बचते हैं, जिसके लिए न्यायपालिका काम करती है. चीफ जस्टिस ने कहा कि कारण बताओ नोटिस की बजाय क्यों न कोर्ट की अवमानना का मुकदमा चलाने की प्रक्रिया शुरू की जाए? सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल माफी स्वीकार करने से इनकार करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि माफी स्वीकार की जाए या नहीं , ये हम आगे चलकर तय करेंगे. अभी नहीं कह सकते हैं कि माफी की गुहार सही है या नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी को यह निर्देश दिया है कि केन्द्र और राज्य सरकारों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करें कि किताब की सभी कॉपी, हार्ड कॉपी या सॉफ्ट कॉपी, चाहे वे रिटेल दुकानों या स्कूलों में रखी हों, पब्लिक एक्सेस से हटा दी जाएं.
कोर्ट ने सभी फिजिकल और डिजिटल प्लेटफॉर्म से तुरंत इसकी कॉपी हटाने के निर्देश दिए और कहा कि आदेश का अनुपालन कर दो हफ्ते में रिपोर्ट फाइल करें. कोर्ट ने कहा कि एनसीईआरटी के डायरेक्टर की यह जिम्मेदारी होगी कि वे ऐसे स्कूलों के कैंपस में भेजी गई सभी किताबों को तुरंत ज़ब्त करें. सीजेआई ने कहा कि किताब के प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन पर भी पूरी तरह बैन रहेगा. इस मामले में अगली सुनवाई अब 11 मार्च को होगी.
इससे पहले, सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि एनसीईआरटी के इस कदम ने न्यायपालिका पर गोलीबारी की है. न्यायपालिका रक्त रंजित ही गई है. पब्लिक डोमेन में डालने के बाद बाजार से किताबें वापस उठाने का क्या मतलब है? केंद्र सरकार और एनसीईआरटी का बचाव करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह बच्चों को न्याय समय पर न मिलने से न्याय से वंचित रहने वाली बात समझाने की कोशिश थी.

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