
नशे के खिलाफ जंग में पंजाब की नई पहल… शुरू हुई देश की पहली ‘मेंटल हेल्थ फेलोशिप’, 60 हजार वेतन
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पंजाब सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य और नशा-निवारण में बड़ा कदम उठाते हुए देश की पहली सरकारी ‘मेंटल हेल्थ लीडरशिप फेलोशिप’ शुरू की है. फेलोज़ को 60,000 रुपये मासिक मानदेय मिलेगा. आवेदन 7 दिसंबर तक खुले हैं.
पंजाब सरकार ने नशे और मानसिक स्वास्थ्य की जटिल लड़ाई को लेकर ऐसी पहल की है, जो पूरे देश के लिए मिसाल बन सकती है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने “लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ फेलोशिप प्रोग्राम” लॉन्च करके साफ किया कि ‘युद्ध नशा विरुद्ध’ अब केवल नारा नहीं, बल्कि एक ज़मीनी आंदोलन है - हर परिवार की सुरक्षा और समाज के भविष्य का सवाल.
यह देश की पहली सरकारी मानसिक स्वास्थ्य फैलोशिप है, जिसका मकसद सिर्फ इलाज नहीं बल्कि समाज के मनोबल को मजबूत करना है. यह फेलोशिप दो साल की अवधि की होगी, और इसमें चुने गए युवा विशेषज्ञों को पंजाब के ग्रामीण और शहरी इलाकों में भेजा जाएगा, जहां वे मानसिक स्वास्थ्य, नशा रोकथाम और पुनर्वास जैसे विषयों पर सक्रिय रूप से काम करेंगे.
इस पूरी पहल की खास बात यह है कि इसे एम्स मोहाली और टीआईएसएस (टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज) मुंबई के साथ साझेदारी में शुरू किया गया है. कार्यक्रम के तहत 35 युवा फेलो चुने जाएंगे, जिनकी पृष्ठभूमि साइकोलॉजी या सोशल वर्क में होगी.
ये पेशेवर पंजाब के 23 जिलों में स्कूलों, कॉलेजों, कम्युनिटी सेंटर्स और रिहैब संस्थानों के साथ मिलकर एक नया मॉडल लागू करेंगे. जो रोकथाम, उपचार और पुनर्वास, तीनों को एक साथ जोड़ता है.
मुख्यमंत्री भगवंत मान की सोच साफ है - नशे से लड़ाई सिर्फ पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं हो सकती. समाज के भीतर मानसिक मजबूती और सकारात्मकता लानी होगी. यही वजह है कि इस फैलोशिप के तहत फेलोज़ को टीआईएसएस मुंबई से खास ट्रेनिंग दी जाएगी. उन्हें मेंटरशिप, नेतृत्व कौशल और स्थानीय समुदायों के साथ काम करने की व्यावहारिक समझ विकसित करने का मौका मिलेगा.
हर फेलो को 60,000 रुपये मासिक सम्मानजनक सैलरी दी जाएगी ताकि वे पूरी लगन और ऊर्जा से इस मिशन पर काम कर सकें. यह सिर्फ एक सरकारी परियोजना नहीं, बल्कि पंजाब में नई सामाजिक चेतना की शुरुआत है - वो चेतना जो समझती है कि नशे से लड़ाई मन से ही शुरू होती है.

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