
'नरेंद्र सरेंडर' वाले बयान पर राहुल गांधी को बीजेपी से बेहतर तो शशि थरूर ने घेरा
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जहां बीजेपी ने राहुल गांधी पर पाकिस्तान का एजेंट जैसे अतिशयोक्तिपूर्ण आरोप लगाए, वहीं थरूर ने तथ्यपरक और कूटनीतिक जवाब देकर राहुल के बयान की कमजोरी को उजागर किया. बीजेपी के हमले वोट बटोरने वाले थे, लेकिन थरूर की प्रतिक्रिया ने बिना व्यक्तिगत हमले किए राहुल के तर्क को कमजोर कर दिया.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान युद्धविराम को लेकर लगातार हमलावर हैं. पर 4 जून 2025 को राहुल गांधी ने हद ही कर दी. उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दबाव में आत्मसमर्पण कर दिया. इतना ही नहीं ये सब कहने का अंदाज भी उनका इतना खराब था कि जैसे कोई दुश्मन देश का बंदा बोल रहा हो. राहुल गांधी ने 3 जून को मध्य प्रदेश में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि, 'मैं बीजेपी और आरएसएस वालों को अच्छे से जान गया हूं. इनको थोड़ा सा दबाओ तो डर कर भाग जाते हैं.'राहुल ने आगे कहा, उधर से ट्रंप ने फोन किया और इशारा किया कि मोदी जी क्या कर रहे हो? नरेंदर, सरेंडर. और 'जी हुजूर' कर के मोदी जी ने ट्रंप के इशारे का पालन किया. राहुल गांधी ने 1971 के युद्ध के दौरान इंदिरा गांधी के मजबूत नेतृत्व के साथ तुलना करते हुए बीजेपी और आरएसएस पर दबाव में झुकने का आरोप लगाया. जाहिर है कि इस बयान पर राजनीतिक हलकों में विवाद होना ही था. बीजेपी ने इसे राष्ट्रद्रोह और भारतीय सेना का अपमान करार देते हुए राहुल गांधी की कड़ी आलोचना की है.
लेकिन इसी बीच खास यह रहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने राहुल गांधी के इस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी. थरूर ने न केवल राहुल गांधी को उनके इस बयान के लिए घेरा बल्कि इस मुद्दे पर बीजेपी नेताओं की तुलना में बहुत अच्छे तरीके से अपनी बात रखी. थरूर, जो ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत का पक्ष रखने के लिए अमेरिका में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं, ने स्पष्ट किया कि भारत-पाकिस्तान के बीच जंग को समाप्त कराने में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं की थी.
राहुल गांधी का नरेंद्र सरेंडर बयान
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि डोनाल्ड ट्रम्प के दावों के अनुसार, जिन्होंने भारत-पाकिस्तान युद्धविराम में अपनी भूमिका का दावा किया था, पीएम मोदी ने ट्रम्प के सामने आत्मसमर्पण किया. राहुल ने इसे 1971 के युद्ध में इंदिरा गांधी के नेतृत्व से तुलना करते हुए कहा कि कांग्रेस ने कभी भी बाहरी दबाव के सामने झुके बिना मजबूती से देश का नेतृत्व किया. इस बयान ने बीजेपी को हमलावर होने का मौका दिया, और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इसे राष्ट्रद्रोह करार देते हुए कहा कि राहुल गांधी ने भारतीय सेना की वीरता और साहस का अपमान किया है. नड्डा ने दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने 300 किमी तक पाकिस्तान में प्रवेश किया, 11 हवाई अड्डों को नष्ट किया, 9 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया, और 150 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया.
बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें डीजीएमओ, विदेश मंत्रालय, और यहां तक कि कांग्रेस के अपने नेताओं जैसे शशि थरूर, मनीष तिवारी, और सलमान खुर्शीद पर भरोसा करना चाहिए, जिन्होंने स्पष्ट किया कि कोई मध्यस्थता नहीं हुई थी. बीजेपी ने राहुल गांधी को पाकिस्तान का एजेंट तक करार दिया, जिससे यह विवाद और गहरा गया.
शशि थरूर की सधी हुई प्रतिक्रिया

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