
नक्सलियों से संबंध के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहे प्रोफेसर साईबाबा समेत 5 अन्य को हाई कोर्ट ने किया बरी
AajTak
अदालत ने मार्च 2017 के गढ़चिरौली सत्र अदालत के फैसले के खिलाफ जीएन साईबाबा द्वारा दायर अपील पर अपना फैसला सुनाते हुए उन्हें बरी कर दिया. जीएन साईबाबा 90 प्रतिशत शारीरिक रूप से अक्षम हैं. उन्होंने हमेशा ही माओवादियों का साथ देने के आरोप को झूठा बताया है.
बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जीएन साईबाबा और पांच अन्य को बरी कर दिया. इन लोगों को साल 2017 में माओवादियों से कनेक्शन के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी.
अदालत ने मार्च 2017 के गढ़चिरौली सत्र अदालत के फैसले के खिलाफ जीएन साईबाबा की ओर से दायर अपील पर अपना फैसला सुनाया. जीएन साईंबाबा 90 प्रतिशत शारीरिक रूप से अक्षम है. उन्हें गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी.
इस मामले में साईबाबा के अलावा पांच अन्य को दोषी ठहराया गया था. उन्होंने भी हाई कोर्ट में अपील दायर की थी. दोषियों में से पांडु नरोटे का हाल ही में निधन हो गया, जबकि विजय तिर्की,महेश तिर्की, हेम मिश्रा, प्रशांत राही सभी बरी कर दिए गए हैं.
कौन हैं जीएन साईबाबा?
साईबाबा पर शहर में रहकर माओवादियों के लिए काम करने का आरोप था. क्रांतिकारी डेमोक्रेटिक फ्रंट माओवादियों का एक गुट है. इन लोगों पर इस गुट के सदस्य होने का आरोप था. हालांकि खुद उन्होंने हमेशा ही माओवादियों का साथ देने के आरोप को झूठा बताया है.
माना जाता है कि साईबाबा हमेशा से आदिवासियों के हितों के पैरोकार रहे हैं. 1990 से वे आरक्षण के समर्थन में मुहिम चला रहे हैं. सितंबर 2009 में कांग्रेस सरकार के शुरू किए गए ऑपरेशन ग्रीन हंट में भी वे पकड़े गए थे. ऑपरेशन ग्रीन हंट माओवादियों पर काबू पाने के लिए शुरू हुआ था.

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









