
देश में दूध कम, घी का प्रोडक्शन ज्यादा... आपकी पांचों उंगलियां घी में या चर्बी में?
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आन्ध्र प्रदेश का तिरुपति बालाजी मन्दिर भगवान विष्णु के अवतार भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित है, जहां दर्शन के लिए आने वाले हिन्दू श्रद्धालुओं को पिछले 300 वर्षों से 'लड्डू' का विशेष प्रसाद दिया जा रहा है और इस लड्डू को वर्ष 2014 में GI टैग भी मिल चुका है, जिसका मतलब ये है कि तिरुपति तिरुमाला के नाम से ये लड्डू सिर्फ आन्ध्र प्रदेश के तिरुपति मन्दिर में ही मिल सकता है.
आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर के लड्डू प्रसादम का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. CM चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया है कि जिस घी से लड्डू का प्रसाद तैयार किया जाता था, उसमें मछली के तेल और जानवरों की चर्बी की मिलावट पाई गई है. इस घटना के बाद देशभर के लोग घी के घोटाले पर बात कर रहे हैं और पूछ रहे हैं कि क्या तिरुपति मंदिर के प्रसाद में बहुत बड़ा पाप हुआ है? एक ज़माने में जब लोग लंबी उम्र तक जीते थे, तब समाज कहता था कि इन लोगों ने ज़रूर अपनी जवानी में अच्छा दूध-दही और घी खाया होगा. इसी तरह जब कोई व्यक्ति कुछ शुभ बोलता है तो लोग कहते हैं कि आपके मुंह में घी-शक्कर. सफल व्यक्ति के लिए कहते हैं कि उसकी पांचों उंगलियां घी में हैं और अपने भारत के लिए कहते हैं कि यहां दूध और घी की नदियां बहती हैं.
लेकिन अब ऐसा लगता है कि हमारे देश में नकली दूध और नकली घी की नदियां बह रही हैं और ये नकली घी इस नदी में तैरते हुए अब तिरुपति मन्दिर के प्रसाद में भी पहुंच गया है. विडम्बना ये है कि भारत में औसतन हर 20 दिनों में कहीं ना कहीं नकली और मिलावटी घी के खिलाफ कार्रवाई होती है और ये घी आपके घरों की रसोई में भी अपनी जड़ें जमाकर बैठ चुका है, लेकिन जैसे ही ये घी मन्दिर के प्रसाद में पहुंचा तो ये भारत की सबसे बड़ी खबर बन गया है और अब घर-घर में इस घी वाले घोटाले की चर्चा हो रही है. ऐसे में सवाल ये भी है कि क्या अगर किसी मिठाई की दुकान पर रखे लड्डुओं की लैब में जांच होगी तो क्या उन लड्डुओं के घी में भी यही जानवरों की चर्बी और फैट हो सकता है?
अब खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण करेगा जांच इस मुद्दे पर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से फोन पर बात की है और ये भी कहा है कि मोदी सरकार इस पूरे मामले की जांच भारत के खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण से कराएगी.
रिपोर्ट में सामने आईं तीन बातें अब FSSAI की टीम उस रिपोर्ट की जांच करेगी, जिसमें ये दावा है कि तिरुपति मन्दिर में प्रसाद के लिए बनने वाले लड्डुओं के घी में सूअर की चर्बी, बीफ का FAT और मछली का तेल इस्तेमाल होता था और इस रिपोर्ट को लेकर भी तीन बड़ी बातें पता चली हैं.
पहली बात- ये रिपोर्ट उन लड्डुओं और घी के सैंपल्स पर आधारित है, जो इसी साल जुलाई के पहले हफ्ते में जांच के लिए भेजे गए थे. दूसरी बात- इन सैंपल्स की जांच गुजरात की एक सरकारी लैब में हुई है, जिसका नाम है सेंटर फॉर एनालिसिस एंड लर्निंग इन लाइवस्टोक्स एंड फूड. ये लैब गुजरात के आणंद ज़िले में है और इसका संचालन भारत सरकार के एक बोर्ड द्वारा किया जाता है, जिसका नाम नेशनल डेयरी डवलपमेंट बोर्ड है.तीसरी बात- जिन सैंपल्स को जांच के लिए भेजा गया, वो सैंपल मंदिर समिति ने खुद इस सरकारी लैब को भेजे थे और ये रिपोर्ट 17 जुलाई को ही सार्वजनिक हो गई थी.
रिपोर्ट जुलाई में आई तो अब क्यों उठाया मुद्दा? अब बहुत सारे लोग पूछ रहे हैं कि जब ये रिपोर्ट 17 जुलाई को आ गई थी तो मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने ये मुद्दा दो महीने बाद सितम्बर में क्यों उठाया? तो सच्चाई ये है कि आन्ध्र प्रदेश की सरकार ने ये मुद्दा जुलाई के महीने में ही उठाया था और इसकी जांच के बाद खराब क्वॉलिटी का घी भेजने वाली एक डेयरी कम्पनी को ब्लैकलिस्ट भी कर दिया था, लेकिन ये मामला अभी इसलिए उछला क्योंकि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इस पर हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बयान दिया था.

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