
देश के राज्यों की भांग की खेती को वैध करने की खुलकर मांग; क्या हैंं नियम, इतिहास और वजह? जानिए सब
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भारत में भांग की खेती को वैध करने की मांग की जा रही है. कई देशों में इसे वैद्य भी घोषित किया जा चुका है. लेकिन ज्यादातर देशों में अभी भी बैन है, जहां इसके इस्तेमाल को लीगल करने की मांग की जा रही है. ऐसे में सवाल है कि इस पौधे को लेकर वैज्ञानिक शोध, डॉक्टर और बिजनेसमैन की क्या राय है? आइये विस्तार से समझते हैं.
भांग, गांजा और चरस और इससे होने वाले दुष्परिणामों से हममें से ज्यादातर लोग वाकिफ ही होंगे, लेकिन कई देशों के बाद अब भारत के कुछ राज्यों में भी भांग की खेती को वैध करने की पुरजोर मांग की जा रही है. कई देशों में इसे वैध घोषित किया जा चुका है. यहां सवाल उठता है कि आखिर भांग का पौधा दुनिया के ज्यादातर देशों में क्यों बैन है? और यदि इसके भारी नुकसान हैं तो इसे लीगल करने की मांग क्यों उठने लगी है. आइये विस्तार से समझते है.
भांग, गांजा और चरस, तीनों में क्या कनेक्शन?
AIIMS Delhi में 3 साल से अधिक समय तक कैनाबिस पौधे और उससे जुड़े एडिक्शन पर शोध कर चुके डॉ. अनिल शेखावत के मुताबिक, भांग 'Cannabis Sativa' प्रजाति का पौधा है. इस पौधे को हिस्सों में बांटा जाए तो सबसे ऊपरी हिस्सा इसके फूल और फल का आता है. इसके बाद आती हैं पत्तियां. फिर तना और अंत में जड़. सबसे ऊपर वाले पार्ट यानी पौधे के फल-फूल वाले हिस्से को सुखाकर गांजा तैयार किया जाता है. यदि सूखने के बाद इसका तेल भी निकाल लिया जाए तो यह चरस बन जाता है. जबकि इसके पत्तियों से भांग बनती है. इसके तने और जड़ों का इस्तेमाल इंडस्ट्रियल यूज के लिए किया जाता है.
भांग की खेती को लीगल करने की मांग क्यों?
भांग की खेती की हिमायत करने वाले हिमाचल प्रदेश में कुल्लू से कांग्रेस विधायक सुंदर सिंह ठाकुर का कहना है कि राज्य से भारी मात्रा में भांग की तस्करी की जाती है. यदि इसे वैध कर दिया जाता है तो कैंसर के जैसी कई बीमारियों की मेडिसिन में इस्तेमाल किया जा सकेगा. साथ में राज्य की आय भी बढ़ेगी. बता दें कि कोई पहला राज्य नहीं है जो इसे वैध करने की मांग कर रहा है.
भारत में कैनाबिस को कब बैन किया गया?

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