
दिल्ली: जामा मस्जिद के बाहर सैकड़ों लोगों ने किया प्रदर्शन, शाही इमाम बोले- मुझे तो जानकारी ही नहीं थी...
AajTak
पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कथित तौर विवादित बयान देने के बाद देश ही नहीं दुनिया भर के मुश्लिम देशों में भारी नाराजगी है. शुक्रवार को दिल्ली, यूपी, झारखंड, पश्चिम बंगाल के अलावा बांग्लादेश में भी नूपुर शर्मा के खिलाफ प्रदर्शन किया गया.
पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ विवादित टिप्पणी को लेकर दिल्ली की जामा मस्जिद परिसर में शुक्रवार को नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी करते हुए दोनों पर कार्रवाई की मांग की है. वहीं इस विरोध को लेकर जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी ने चौंकाने वाला बयान दिया. उन्होंने आजतक/इंडिया टुडे से कहा,'मुझे तो पता भी नहीं था कि जामा मस्जिद की तरफ से इस तरह का प्रदर्शन किया जा रहा है.
नूपुर शर्मा के बयान पर जुमे की नमाज के बाद बवाल, तस्वीरों में देखें देश के इन शहरों का हाल
पुलिस को भी नहीं थी प्रदर्शन की सूचना
शाही इमाम ने बताया कि नमाज के बाद अचानक जामा मस्जिद चौक पर यानी गेट नंबर एक पर नारे लगने लगे. उन्होंने कहा कि ये कौन लोग हैं यह तो पता नहीं लेकिन पुलिस पता लगाएगी ही, पुलिस को मालूम होगा ये कौन लोग हैं, किन लोगों ने ये नारेबाजी की है. उन्होंने कहा कि किसी को पता नहीं था, मेरे खयाल से पुलिस को भी यह नहीं पता था कि ऐसा कोई प्रदर्शन होने वाला है.
कल हो रही थी दिल्ली बंद करने की मांग
शाही इमाम ने बताया कि कल जरूर कुछ लोग चाहते थे कि दिल्ली में बंद बुलाया जाए लेकिन सबको मना कर दिया गया था. उन्होंने बताया कि सभी से कह दिया गया था कि बंद करने की इजाजत नहीं है क्योंकि कौन क्या शरारत कर दे इसका कुछ नहीं पता इसलिए बंद की सोशल मीडिया पर की जा रही अपील को खत्म करा दिया गया था. मालूम हो कि इससे पहले गुरुवार को पार्लियामेंट थाने के सामने ओवैसी की पार्टी AIMIM के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

दावोस में भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है. इस संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से खास बातचीत की गई जिसमें उन्होंने बताया कि AI को लेकर भारत की क्या योजना और दृष्टिकोण है. भारत ने तकनीकी विकास तथा नवाचार में तेजी लाई है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रह सके. देखिए.

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एमआईएम के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत हासिल करने वाली सहर शेख एक बयान की वजह से चर्चा में हैं. जैसे ही उनका बयान विवादास्पद हुआ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान धार्मिक राजनीति से जुड़ा नहीं था. सहर शेख ने यह भी कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और वे उस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं.








