
दरवाजे पर खड़े होकर बोला- 'तलाक, तलाक, तलाक'; निकाह के 23 साल बाद प्रोफेसर पत्नी को छोड़ा
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Gujarat News: प्रोफेसर दंपती की शादी साल 2001 में हुई थी. तब उसका पति कोई नौकरी-धंधा नहीं किया करता था. शादी के 1 महीने बाद से ही पति अपनी पत्नी को पति शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित करता रहता था.
Gujarat News: अहमदाबाद के साइंस कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर की शादी साल 2001 में मसीहुझमा अंसारी के साथ हुई थी. शादी के 13 साल बाद यानी साल 2014 में मसीहुझमा को गुजरात यूनिवर्सिटी के उर्दू पर्शियन डिपार्टमेंट में प्रोफेसर के तौर पर नौकरी मिली. दोनों प्रोफेसर दंपती के तीन बच्चे हैं. महिला प्रोफेसर की तरफ से दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि प्रोफेसर पति-पत्नी के बीच हो रहे झगड़े की वजह से वह अपने बच्चों को लेकर अलग रह रही थी. इस दौरान अक्टूबर महीने में पति ने अन्य एक महिला से शादी कर ली. महिला प्रोफेसर अपने पति से मिलने पहुंची, लेकिन पति ने झगड़ा करके ट्रिपल तलाक दे दिया.
गोमतीपुर पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, प्रोफेसर दंपती की शादी साल 2001 में हुई थी. तब उसका पति कोई नौकरी-धंधा नहीं किया करता था. शादी के 1 महीने बाद से ही पति अपनी पत्नी को पति शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित करता रहता था. दोनों दंपती के तीन बच्चे हैं, जिसमें सबसे बड़ी 21 साल की बेटी, उसके बाद 16 साल की बेटी और एक 12 साल का बेटा है.
साल 2001 में जब दोनों का निकाह हुआ तब मसीहुझमा अंसारी कोई काम धंधा नहीं करता था. मसीहुझमा अपनी प्रोफ़ेसर पत्नी के पगार में से ही ऐशो-आराम करता था. प्रोफेसर पत्नी के ही एटीएम कार्ड और चेकबुक से जब भी चाहता तब पैसे निकाल लिया करता था. आरोप है कि पति मसीहुझमा अंसारी ने अपनी बहन की पढ़ाई और शादी का खर्च भी प्रोफेसर पत्नी की पगार में से ही किया था.
प्रोफेसर पत्नी ने बच्चों को लेकर भी चौंकाने वाले आरोप अपने प्रोफेसर पति पर लगाए हैं. फरियादी के मुताबिक, पहली बेटी के जन्म के बाद साल 2008 में वह दोबारा गर्भवती हुई तब पति ने कहा था कि इस बार पुत्री का जन्म नहीं होना चाहिए, अगर पुत्री का जन्म होगा तो सुखचैन से रहने नहीं देगा. इसके बाद दूसरी भी बेटी का ही जन्म हुआ तो प्रोफेसर पति ने अपनी पत्नी और दोनों बच्चों पर मानसिक जुल्म शुरू कर दिया था.
इसके बाद, साल 2012 में प्रोफेसर पत्नी तीसरी बार गर्भवती हुई तब भी प्रोफेसर पति ने अपनी पत्नी से कहा था कि अगर इस बार बेटी का जन्म हुआ तो तुझे और तेरी बेटियों को जान से मार दूंगा. इसके बाद प्रोफेसर पत्नी को बेटा हुआ. लेकिन इसके बावजूद भी प्रोफेसर पति के स्वभाव में कोई परिवर्तन नहीं आया और छोटी-छोटी बातों पर गाली-गलौज करके शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रोफेसर पति अपनी पत्नी और तीनों बच्चों को लगातार परेशान करता रहा.
प्रोफेसर मसीहुझमा अंसारी अपनी पत्नी को कहता था, तुम मुझे पसंद नहीं हो, तुम मुझे अच्छी नहीं लगती हो, तुम मेरे लिए बोझ बन गई हो, मुझे दूसरी शादी करनी है, तो तलाक के पेपर पर हस्ताक्षर करके तलाक दे दो. इस बात को लेकर महिला प्रोफेसर ने अपने माता-पिता और भाइयों से बातचीत की थी. इसके बाद सभी ने प्रोफेसर पति को समझने की कोशिश करने के बावजूद वह माना नहीं था. लेकिन शादीशुदा जीवन को चलाने के लिए महिला प्रोफेसर ने सब कुछ सहन करना सही समझा.

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