
थाईलैंड में नौकरी, मोटी सैलरी का वादा... ऐसे लाओस में फंसे थे 25 भारतीय, अब दो एजेंट गिरफ्तार
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इस रैकेट का खुलासा 23 साल के पीड़ित सिद्धार्थ यादव की शिकायत के बाद पुलिस ने किया. मुंबई पुलिस ने इस रैकेट के सरगना 46 वर्षीय जेरी जैकब और उसके सहयोगी गॉडफ्रे अल्वारेस (39) को गिरफ्तार कर लिया. ये दोनों वही एजेंट हैं, जिनके जरिए 35 ज्यादा भारतीय विदेश गए थे.
विदेश में नौकरी की चाहत और मोटी सैलरी का लालच कई बार भारी पड़ जाता है. कुछ ऐसा ही हुआ उन 25 से ज्यादा भारतीयों के साथ, जिन्हें थाईलैंड में मोटी सैलरी वाली नौकरियों का लालच देकर धोखाधड़ी का शिकार बना लिया गया. असल में उन सभी को थाईलैंड नहीं, बल्कि लाओस ले जाया गया. और वहां उन्हें साइबर धोखाधड़ी करने के लिए मजबूर किया गया. आइए आपको बताते हैं ये पूरा मामला.
ये पूरी वारदात और इस रैकेट का खुलासा 23 साल के पीड़ित सिद्धार्थ यादव की शिकायत के बाद पुलिस ने किया. मुंबई पुलिस ने इस रैकेट के सरगना 46 वर्षीय जेरी जैकब और उसके सहयोगी गॉडफ्रे अल्वारेस (39) को गिरफ्तार कर लिया. ये दोनों वही एजेंट हैं, जिनके जरिए 35 ज्यादा भारतीय विदेश में नौकरी करने के नाम पर बाहर गए थे.
मुंबई पुलिस ने इस मामले में जानकारी देते हुए पीटीआई को बताया कि पीड़ित सिद्धार्थ यादव की शिकायत पर 23 मार्च को मामला दर्ज किया गया था. इस मामले में जेरी जैकब और गॉडफ्रे अल्वारेस के अलावा सनी नाम का एक अन्य एजेंट भी नामजद है.
नौकरी सिंडिकेट का शिकार बने सिद्धार्थ यादव ठाणे के निवासी हैं. वो और तीन अन्य लोग दक्षिणपूर्व एशियाई देश में भारतीय दूतावास की मदद से लाओस से भारत लौटने में कामयाब रहे. यादव ने पुलिस को बताया कि वह अच्छा पैसा कमाने की उम्मीद में दिसंबर 2022 में थाईलैंड गया था, लेकिन उसे थाईलैंड सीमा के पास लाओस में एक जगह ले जाया गया.
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी जैकब, अल्वारेस और सनी ने सिद्धार्थ यादव और लगभग दो दर्जन भारतीयों को कॉल सेंटरों में जबरन काम कराया. और फर्जी सोशल मीडिया खातों के जरिए उनसे यूरोप, अमेरिका और कनाडा में लोगों के साथ धोखाधड़ी करने को मजबूर किया.
सिद्धार्थ ने पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में कहा कि कॉल सेंटरों ने मामूली कारण बताकर कर्मचारियों पर भारी जुर्माना लगाया गया. जब वो और तीन अन्य लोग अपनी वापसी के लिए लाओस में भारतीय दूतावास पहुंचे तो आरोपियों ने उनकी पिटाई की. पुलिस अधिकारी ने बताया कि भारतीय दूतावास के दखल से स्थानीय पुलिस ने सिद्धार्थ यादव सहित दूसरे युवाओं को वहां से निकाला.

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