
अब E30 पेट्रोल की तैयारी! AIDA ने सरकार से की एथेनॉल ब्लेंडिंग बढाने की मांग
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E30 Petrol: ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) ने सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग 20% से बढ़ाकर 30% तक करने की मांग की है. इसके अलावा डीजल में भी एथेनॉल ब्लेंडिंग की संभावनाओं को तलाशने की बात कही जा रही है. सरकार पहले की कह चुकी है कि, एथेनॉल ब्लेंडिंग के चलते भारत ने करोड़ो बैरल कम तेल आयात किया है.
Ethanol Blending in Petrol: दुनिया में तनाव बढ़ रहा है. तेल महंगा हो रहा है. और भारत अपनी जेब और जरूरत, दोनों को बचाने का रास्ता खोज रहा है. ऐसे में एथेनॉल एक बार फिर चर्चा में है. ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) ने केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को चिट्ठी लिखी है. मांग सीधी है. पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाई जाए, और ऐसे वाहनों पर फोकस किया जाए जो फ्लेक्स फ्यूल पर बेस्ड हों. यानी मामला सिर्फ फ्यूल का नहीं, देश की एनर्जी सिक्योरिटी का है.
दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिमी एशिया के तनाव के बीच भारत अब अपने फ्यूल ऑप्शन को बेहतर करने में लगा है. बीते कल यानी 23 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में दिए गए अपने संबोधन में भी भारत के दशकों पहले की गई तैयारियों के फायदे को गिनाया. पीएम मोदी ने कहा कि, "भारत ने बीते 11 सालों में अपनी एनर्जी इंपोर्ट का डायवर्सिफिकेशन किया है. पहले क्रूड ऑयल, एलपीजी, एनएनजी ऐसी एनर्जी जरूरतों के लिए 27 देशों से इंपोर्ट किया जाता था. लेकिन आज भारत 41 देशों से एनर्जी इंपोर्ट करता है."
वहीं एथेनॉल को लेकर उन्होंने कहा कि, "संकट के इस समय में देश की एक और तैयारी भी बहुत काम आ रही है. पिछले 10-11 साल में एथेनॉल के प्रोडक्शन और उसके ब्लेंडिंग पर बहुत बढ़िया काम हुआ है. एक दशक पहले तक पेट्रोल में केवल 1-2% तक एथेनॉल ब्लेंडिंग करते थें. लेकिन अब हम पेट्रोल में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग कर रहे हैं, जिसके कारण सालाना करीब साढ़े 4 करोड़ बैरल कम पेट्रोल इंपोर्ट करना पड़ रहा है."
इसी कड़ी में ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन ने सरकार को पत्र लिखकर एथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ाने की मांग की है. AIDA का कहना है कि यह कदम न केवल पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि देश की एनर्जी सिक्योरिटी को भी मजबूत बनाएगा.
AIDA ने अपने पत्र में कहा कि, भारत ने तय समय से पहले पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का टार्गेट पूरा कर लिया है, जो सरकार और इंडस्ट्री के साझा प्रयासों के बदौलत संभव हो पाया है. अब संस्था चाहती है कि इस लेवल को बढ़ाकर 30 प्रतिशत किया जाए. उनका मानना है कि ऐसा करने से कच्चे तेल के आयात में बड़ी कमी आएगी, जिससे देश का विदेशी मुद्रा खर्च भी घटेगा और अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी.
संस्था ने यह भी चेतावनी दी है कि पश्चिमी एशिया में चल रहे तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिसका सीधा असर भारत जैसे देश पर पड़ सकता है. क्योकि हमारे यहां ऑयल इंपोर्ट पर निर्भरता ज्यादा है. ऐसे हालात में एथेनॉल जैसे घरेलू और बेहतर फ्यूल ऑप्शन पर फोकस करना जरूरी है. एथेनॉल देश की इकोनॉमी के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा.

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