
तख़्ता पलटने के बाद उद्धव ठाकरे को फिर साथ लाना चाह रही BJP?: दिन भर, 9 फरवरी
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लोकसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र में बीजेपी कैसे एक तीर से दो निशाना लगाना चाह रही है, भूकंप की विनाशलीला झेल रहे तुर्किए में लोगों को किस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, भारत और अमेरिका समेत कई देशों की जासूसी में लगाए गए चीन के विशाल गुब्बारों की ख़ासियत क्या है और नागपुर टेस्ट के पहले दिन ही ऑस्ट्रेलिया की हालत पतली क्यों हुई, सुनिए आज के 'दिन भर' में कुलदीप मिश्र से.
संसद में पेश हुए बजट पर चर्चा और भाषणों का दौर चल रहा है. विपक्ष अदाणी मसले पर लगातार हमलावर है और जांच के लिए जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी यानी जेपीसी बनाने की मांग कर रहा है. उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत बीजेपी सांसद विपक्ष को घेर रहे हैं. कल प्रधानमंत्री लोकसभा में बोले थे और आज अपर हाउस यानि राज्य सभा में बोले. ये भी एक लंबा भाषण था, करीब 85 मिनट का. वित्त मंत्री का बजट भाषण करीब 87 मिनट का था, उससे दो ही मिनट छोटा. प्रधानमंत्री के भाषणों में विपक्ष पर तीखी चुटकियां भी थीं और अपने कार्यकाल की उपलब्धियां भी.
प्रधानमंत्री एक तरह से 2024 के चुनाव का नैरेटिव सेट करते हुए दिखे, लेकिन सियासी बिसात ज़मीन पर भी बिछाई जा रही है. सबसे ज़्यादा लोकसभा सीट उत्तर प्रदेश में हैं और उसके बाद नंबर आता है महाराष्ट्र का जहाँ 48 लोकसभा सीटें हैं. पिछले साल बीजेपी ने शिवसेना में सेंधमारी कर उद्धव ठाकरे का तख़्ता पलट कर दिया था और एकनाथ शिंदे नए मुख्यमंत्री बने थे. लेकिन बीजेपी एक बार फिर प्रयास कर रही है कि लोकसभा चुनाव से पहले वो आधी नहीं बल्कि पूरी शिवसेना के साथ गठबंधन करे. यानी उद्धव ठाकरे के साथ. ऐसा वो क्यों करना चाह रहे हैं, क्या उद्धव के महाविकास अघाड़ी से छिटकने के संकेत दिख रहे हैं और देवेंद्र फड़नवीस का क्या रवैया रहने वाला है सेंट्रल लीडरशिप के इस मूव को लेकर, सुनिए 'दिन भर' की पहली ख़बर में.
तुर्किये और सीरिया में जबरदस्त भूकंप का कहर वहां के लोग झेल रहे हैं. दोनों मुल्कों को मिलाकर हुई मौत का आंकड़ा 17 हज़ार के पार चला गया है. हज़ारों लोग घायल हैं और पता नहीं कितने लोग अभी भी एक झटके में धराशायी हुई इमारतों के मलबों में दबे और फंसे हुए हैं. इस भूकंप का केंद्र तुर्किए का गज़ियानटेप प्रांत का नूरदागी था. यह जगह सीरिया और तुर्किए के बॉर्डर पर है. साल 2015 में नेपाल में आए भूकंप के बाद इसे सबसे भयावह भूकंप करार दिया जा रहा है. नेपाल भूकंप में करीब नौ हजार लोगों की जान गई थी और यहां अब तक इसके लगभग दो गुना लोगों की मौत हो चुकी है. इंडिया टुडे टीवी के सीनियर जर्नलिस्ट गौरव सावंत वहीं हैं अभी. सीधे चलते हैं उनके पास. गौरव, सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाक़े कौन से हैं और तबाही का स्केल कितना बड़ा है? साथ ही राहत और बचाव के काम किस तरह चल रहे हैं और सरकार पीड़ितों की कितनी मदद कर पा रही है, सुनिए 'दिन भर' की दूसरी ख़बर में.
बीते कुछ सालों से अमेरिका और चीन के कूटनीतिक रिश्तों में आया तनाव अपने चरम पर है.. और इस तनाव को चीन के एक जासूसी गुब्बारे ने और बढ़ा दिया है. दरअसल कुछ दिन पहले अमेरिकी आसमान में एक विशालकाय ग़ुब्बारा दिखा था, तब इसे अमेरिका ने जासूसी ग़ुब्बारा बताया था. बाद में अमेरिकी लड़ाकू विमान एफ-22 ने मिसाइल दागकर इसे गिरा दिया. हालंकि चीन ने सफाई दी कि ये मौसम के बारे में जानकारी जुटाने वाला सामान्य किस्म का गुब्बारा था. लेकिन कहानी यहीं ख़त्म नहीं होती. इस वजह से अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन का चीनी दौरा टाल दिया गया. चीन-अमेरिका के संबंधों में इस घटना को एक बड़ा झटका माना जा रहा है..
अब इस पूरे गुब्बारे प्रकरण के बीच अमेरिका की एक रिपोर्ट आई है जो ये बता रही है कि चीन के 'जासूसी ग़ुब्बारे' कई देशों के लिए चिंता पैदा कर सकते हैं. अमेरिका ने दावा किया है कि चीन ने ज़ासूसी ग़ुब्बारों की मदद से कई देशों को निशाना बनाया है. इन देशों में भारत, जापान, फ़िलिपींस और वियतनाम जैसे देश भी शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक ये गुब्बारे चीन के लिए रणनीतिक तौर पर अहमियत रखने वाले देशों की सेना से जुड़ी जानकारियां जुटाई. तो ये पूरा मामला क्या है, इचीन के इस जासूसी गुब्बारे को लेकर अमेरिकी रिएक्शन कैसा था और भारत के पास ऐसी टैक्टिक्स से बचने का क्या प्लान है, सुनिए 'दिन भर' की तीसरी ख़बर में.

पिछले 18 दिनों से अमेरिका, इजरायल और ईरान के युद्ध का मोर्चा खुला हुआ है. और उधर पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ जंग का एक और फ्रंट खोल दिया है. बीती रात पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक करके एक अस्पताल के 400 मरीज मार डाले. पाकिस्तान को ये लग रहा है कि जब दुनिया का ध्यान ईरान पर है तो वो अफगानिस्तान में कत्लेआम मचा सकता है. और वो इससे बच जाएगा. लेकिन ऐसा होगा नहीं. क्योंकि अब तालिबान ने भी अपने निर्दोष नागरिकों की हत्या का बदला लेना की कसम खा ली है.

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि इजरायल ने ईरान के अली लारिजानी और बसीज कमांडर को मार गिराया है. उन्होंने कहा कि इन हमलों का मकसद ईरान की व्यवस्था को कमजोर करना है. नेतन्याहू के अनुसार, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मिलकर सैन्य सहयोग जारी है और आगे भी कई बड़ी योजनाएं तैयार हैं.











