
तेजस्वी यादव मुफ्त बिजली का वादा क्यों कर रहे हैं? बिहार में जातीय राजनीति का असर नहीं रहा क्या?
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बिहार में मुफ्त बिजली देने का तेजस्वी यादव का वादा भी वैसा ही है, जैसा 10 लाख लोगों को नौकरी देने का, लेकिन ये RJD के मुस्लिम-यादव राजनीति की जड़ें कमजोर होने की तरफ मजबूत इशारा भी है - क्या ये बिहार में प्रशांत किशोर की राजनीतिक सक्रियता का असर भी हो सकता है?
तेजस्वी यादव ने बिहार के लोगों के लिए बड़ा चुनावी वादा किया है. मुफ्त बिजली देने का. ऐसी बातें अरविंद केजरीवाल की स्टाइल वाली राजनीति से निकल कर आई हैं - और बिहार में जन सुराज अभियान चला रहे प्रशांत किशोर को भी कुछ कुछ अरविंद केजरीवाल की पॉलिटिकल लाइन पर ही आगे बढ़ते देखा जा रहा है.
वैसे प्रशांत किशोर खुद को अरविंद केजरीवाल के रास्ते राजनीति में आने की बात से इनकार करते हैं. पीके के नाम से मशहूर प्रशांत किशोर का कहना है कि वो अरविंद केजरीवाल की तरह आंदोलन के रास्ते नहीं आ रहे हैं, बल्कि जन सुराज अभियान लोगों को जागरूक करने की कोशिश कर रहा है.
बिहार के लोग पहले से ही राजनीतिक रूप से सजग और समझदार माने जाते हैं, फिर भी प्रशांत किशोर बिहार के नेताओं की राजनीति को लेकर जिस तरह से जागरूक करने की कोशिश कर रहे हैं, वो थोड़ा अलग है. जब से वो जन सुराज यात्रा पर निकले हैं, अक्सर नीतीश कुमार की खामियां गिनाते हैं और ज्यादातर वक्त यही दोहराते रहते हैं कि बिहार के लोग किसी 'नौवीं फेल नेता' को सत्ता क्यों सौंपना चाहते हैं.
तो क्या तेजस्वी यादव के मुफ्त बिजली के वादे के पीछे प्रशांत किशोर की ही भूमिका है? या फिर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सुशासन को चैलेंज करने का कोई इरादा है? तेजस्वी यादव आरजेडी शासन को 'जंगलराज' के रूप में नीतीश कुमार और बीजेपी के हमलों से लंबे अरसे से परेशान रहे हैं. अव्वल तो वो जंगलराज के लिए कई बार माफी भी मांग चुके हैं, लेकिन 2020 के विधानसभा चुनाव में बहुमत के काफी करीब पहुंच कर भी चूक गये.
पिता लालू यादव से मिली विरासत के तहत तेजस्वी यादव मुस्लिम-यादव वोट बैंक की राजनीति करते हैं, जिसे M-Y फैक्टर के नाम से जाना जाता है. कुछ दिनों से तेजस्वी यादव की राजनीति में जातीय जनगणना का मुद्दा भी जुड़ गया है, हालांकि, इसमें नीतीश कुमार की भी बहुत बड़ी भूमिका है.
लेकिन जिस तरीके से तेजस्वी यादव ने आभार यात्रा के दौरान मुफ्त बिजली का वादा किया है, विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के जातिगत जनगणना अभियान की धार कुंद होने के संकेत लगते हैं.

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