
डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में नहीं... भारत ने इस कारण अमेरिकी आयात पर टैरिफ में की कटौती!
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राष्ट्रपति के रूप में यूएस कांग्रेस को अपने पहले संबोधन के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने वादा किया था कि वह 2 अप्रैल से भारत सहित अमेरिका के अधिकांश व्यापारिक साझेदारों पर उनके देश के प्रति अनुचित व्यापार नीतियों के कारण रेसिप्रोकल टैरिफ लगाएंगे.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की 2 अप्रैल की समय सीमा समाप्त होने में एक महीने से भी कम समय बचा है. इस बीच ट्रंप ने गत 7 मार्च को दावा किया था कि भारत ने अमेरिकी आयात पर टैरिफ में कटौती करने पर सहमति जताई है. उन्होंने इसका श्रेय अपने प्रशासन को दिया. ट्रंप ने दावा किया कि भारत ने यह कदम इसलिए उठाया है, क्योंकि इस मुद्दे पर आखिरकार कोई उसे एक्सपोज कर रहा है.
हालांकि, केंद्र सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने ट्रंप के इन दावों को खारिज किया है कि भारत ने टैरिफ में कटौती उनके प्रशासन के दबाव के कारण लिया है. सूत्रों का कहना है कि भारत ने अमेरिकी आयात पर टैरिफ में कटौती का फैसला राष्ट्रपति ट्रंप के दबाव में नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच पहले से तय व्यापारिक समझौते के कारण लिया है. यह द्विपक्षीय समझौतों के माध्यम से विकसित देशों के साथ व्यापार संबंधों को आगे बढ़ाने के देश के व्यापक प्रयासों के तहत लिया गया फैसला है.
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भारत ने अन्य देशों के लिए भी घटाए टैरिफ
अतीत में भी भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के तहत ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे जैसे देशों के आयात पर लगने वाले टैरिफ में कटौती कर चुका है. वर्तमान में यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ इसी तरह के समझौतों पर बातचीत चल रही है. केंद्र सरकार के सूत्रों ने कहा कि अमेरिका आयात पर टैरिफ कम करने के लिए चल रही चर्चा को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए, न कि ट्रंप प्रशासन के दबाव के कारण.
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने भारत से कृषि उत्पादों को छोड़कर लगभग सभी वस्तुओं पर टैरिफ हटाने को कहा है. अगर यह मांग मान ली जाती है, तो इसका मतलब होगा कि नई दिल्ली को अपने ट्रेड प्रोटेक्शन को छोड़ना पड़ेगा और बदले में उसे कोई रियायत नहीं मिलेगी. अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. पिछले वित्तीय वर्ष में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड 118.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था.

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