
डेंगू-मलेरिया को लेकर क्या है तैयारी? हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार-MCD से मांगी स्टेटस रिपोर्ट
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कोर्ट ने कहा कि डेंगू और मलेरिया को फिलहाल हमें हल्के में नहीं लेना चाहिए क्योंकि कोविड महामारी के चलते पहले ही दिल्ली के हालात बेहद खराब है और अस्पतालों की व्यवस्था अभी किसी दूसरी बीमारी को झेलने के काबिल नहीं है.
दिल्ली में फिलहाल बढ़ रहे मच्छरों के आतंक और आने वाले मॉनसून के मद्देनजर दिल्ली हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर दिल्ली सरकार और दिल्ली की सभी एमसीडी को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने कहा कि सभी एमसीडी और दिल्ली सरकार 3 दिन के भीतर यह बताएं कि मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों से निपटने के लिए फिलहाल क्या तैयारियां की गई हैं. कोर्ट ने कहा, डेंगू और मलेरिया को फिलहाल हमें हल्के में नहीं लेना चाहिए क्योंकि कोविड महामारी के चलते पहले ही दिल्ली के हालात बेहद खराब हैं और अस्पतालों की व्यवस्था अभी किसी दूसरी बीमारी को झेलने के काबिल नहीं है.
कोर्ट ने पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली बनाने पर जोर दिया ताकि बिना नसबंदी वाले कुत्तों की रिपोर्टिंग हो सके. 28 जनवरी को सरकारों की ओर से सॉलिसिटर जनरल अपनी दलीलें प्रस्तुत करेंगे. कोर्ट ने एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट के पॉडकास्ट पर नाराजगी जताई और मामले की गंभीरता को रेखांकित किया. ये सुनवाई आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को जाति के आधार पर अपमानित करने की स्पष्ट मंशा होनी चाहिए। पटना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एफआईआर और आरोप पत्र में जाति-आधारित अपमान के अभाव को रेखांकित किया। कोर्ट ने एससी एसटी एक्ट की धारा 3(1) के प्रावधानों को दोहराते हुए कहा कि केवल अपशब्दों का प्रयोग अपराध नहीं बनता।

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