
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2.19 करोड़ की ठगी, दिल्ली में इंटर-स्टेट साइबर गैंग का पर्दाफाश
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दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2.19 करोड़ की ठगी करने वाले एक इंटर-स्टेट साइबर गैंग का भंडाफोड़ किया है. इस दौरान पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. अभी इस मामले में आगे की छानबीन जारी है.
दिल्ली पुलिस की IFSO (Intelligence Fusion & Strategic Operations) यूनिट ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाले एक बड़े इंटर-स्टेट साइबर गिरोह का खुलासा किया है. यह गैंग खुद को पुलिस, CBI और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराता था. इस गिरोह ने एक 78 वर्षीय बुज़ुर्ग से करीब 2 करोड़ 19 लाख रुपये की ठगी की. मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की. इस केस ने एक बार फिर साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को उजागर किया है. पुलिस के मुताबिक, आरोपी कई राज्यों में फैले हुए थे और सुनियोजित तरीके से ठगी को अंजाम दे रहे थे.
फर्जी अधिकारी बनकर की पहली कॉल पीड़ित बुज़ुर्ग को सबसे पहले एक कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को लखनऊ पुलिस हेडक्वार्टर से सुमित मिश्रा बताया. उसने कहा कि बुज़ुर्ग के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दो गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके हैं।.कॉलर ने बेहद सख्त और धमकी भरे लहजे में बात की, जिससे पीड़ित डर गया. जब बुज़ुर्ग ने उम्र अधिक होने और थाने न जा पाने की बात कही, तो ठगों ने नया हथकंडा अपनाया. उन्होंने भरोसा दिलाया कि कार्रवाई ऑनलाइन ही की जा सकती है. यहीं से ‘डिजिटल अरेस्ट’ की साजिश शुरू हुई.
आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल इसके बाद दूसरे ठग ने खुद को प्रेम कुमार गौतम बताते हुए कॉल की. उसने कहा कि पीड़ित का आधार कार्ड कई गैरकानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ है. ठगों ने डर का माहौल बनाते हुए कहा कि मामला बेहद गंभीर है. उन्होंने पीड़ित से उसकी पूरी संपत्ति, बैंक बैलेंस, नकद और प्रॉपर्टी की जानकारी हासिल कर ली. लगातार दबाव और डर के कारण बुज़ुर्ग मानसिक रूप से टूटने लगा. ठगों का मकसद सिर्फ एक था- पीड़ित को पूरी तरह कंट्रोल में लेना.
24 घंटे की डिजिटल निगरानी ठगों ने पीड़ित को 24 घंटे व्हाट्सऐप वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा. उसे घर से बाहर न निकलने और किसी से बात न करने की सख्त हिदायत दी गई. यहां तक कहा गया कि अगर किसी को बताया तो तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा. भरोसा जमाने के लिए ठगों ने वीडियो कॉल पर फर्जी CBI ऑफिस का सेटअप दिखाया. इतना ही नहीं, एक नकली वकील को भी वीडियो कॉल पर पेश किया गया. यह पूरा नाटक पीड़ित को मानसिक रूप से तोड़ने के लिए किया गया.
2.19 करोड़ रुपये की ठगी डर और दबाव में आकर पीड़ित ने 26 नवंबर से 4 दिसंबर 2025 के बीच अलग-अलग बैंक खातों में कुल 2.19 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए. ठगों ने भरोसा दिलाया कि यह रकम केवल वेरिफिकेशन के लिए है. कहा गया कि जांच पूरी होने के बाद पैसे वापस कर दिए जाएंगे. पीड़ित को लगा कि वह कानून की मदद कर रहा है. लेकिन पैसे ट्रांसफर होते ही ठगों का रवैया बदलने लगा. बाद में 5 दिसंबर को पीड़ित ने IFSO थाने में ई-एफआईआर दर्ज कराई.
IFSO ने शुरू की जांच और डिजिटल ट्रेल मामले की जांच इंस्पेक्टर सुनील कुमार की अगुवाई में गठित विशेष टीम ने की. टीम ने बैंक खातों, कॉल डिटेल्स और डिजिटल फुटप्रिंट्स की गहन जांच शुरू की. जांच में सामने आया कि सबसे पहले ठगी की रकम मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के एक बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी. इसके बाद रकम को अलग-अलग खातों में घुमाया गया. पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण के जरिए पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं. यहीं से आरोपियों तक पहुंचने का रास्ता साफ हुआ.

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