
ट्रंप के ईरान अटैक प्लान से क्यों डरा हुआ है पाकिस्तान, क्या खुद के टूटने का है खतरा?
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ईरान पर अमेरिका के संभावित हमले के बीच पाकिस्तान में चिंता बढ़ गई है, खासकर बलूचिस्तान प्रांत में विद्रोह की आशंका को लेकर. पाकिस्तान को डर है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन से सीमा पार उग्रवाद, हथियार तस्करी और शरणार्थी संकट बढ़ सकता है.
ईरान पर अमेरिका के संभावित हमले के बीच पाकिस्तान के माथे पर पसीना है. अमेरिकी हमले के बढ़ते खतरे के बीच पाकिस्तान को डर है कि अगर ईरान में सत्ता बदली तो विद्रोह की आग उसके यहां भी लग सकती है. पाकिस्तान का अशांत बलूचिस्तान प्रांत ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान से लगा हुआ है जहां आजादी की मांग दशकों से उठ रही है.
ईरान में अमेरिकी हमले से हालात और बिगड़े तो पाकिस्तान के इस प्रांत में विद्रोहियों के और अधिक सक्रिय होने की आशंका है. पाकिस्तान में इस बात की काफी चर्चा है और डिप्लोमैट्स कह रहे हैं कि ईरानी शासन का गिरना पाकिस्तान के लिए तबाही लाएगा.
पाकिस्तान के प्रमुख अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' में एक विश्लेषणात्मक लेख छपा है जिसमें पाकिस्तान के एक्सपर्ट्स और अधिकारियों के हवाले से लिखा गया है, 'पाकिस्तान ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं चाहता, क्योंकि इसकी कीमत तबाही होगी.
लेख में लिखा गया है कि ईरान पाकिस्तान के लिए कोई दूर की चिंता नहीं है. दोनों देशों के बीच करीब 900 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो पाकिस्तान के सबसे संवेदनशील प्रांत बलूचिस्तान से लगती है. ईरान में किसी भी तरह की उथल-पुथल का सीधा असर सीमा पार उग्रवाद, हथियारों की तस्करी, शरणार्थियों की आमद और आर्थिक अस्थिरता के रूप में सामने आ सकता है.
ईरान में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत आसिफ दुर्रानी ने कहा, 'ईरान में किसी भी तरह का बदलाव, चाहे वह अंदरूनी घटनाक्रम से आए या बाहरी हस्तक्षेप से, उसका सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ेगा.'
ईरान में जो भी हो रहा है, उस संबंध में पाकिस्तान सबसे अधिक बलूचिस्तान को लेकर चिंतित है. ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में बलूच जनजाति के लोग रहते हैं जिनके पाकिस्तान के बलूच क्षेत्रों से जातीय, जनजातीय और भाषाई रिश्ते हैं.

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