
जिस कामयाबी पर पूरी इस्लामिक दुनिया दे रही बधाई, उससे क्या हासिल करेगा सऊदी?
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वर्ल्ड एक्सपो 2030 की मेजबानी को अरब दुनिया खासकर सऊदी अरब जिस तरह से एक बड़ी उपलब्धि बता रहा है, ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण हो जाता है कि सऊदी अरब World Expo 2030 से क्या हासिल करना चाहता है?
हाल ही में वर्ल्ड एक्सपो 2030 की मेजबानी के लिए हुई वोटिंग में सऊदी अरब ने इटली और दक्षिण कोरिया को पछाड़ते हुए इसकी बोली जीत ली है. इसकी मेजबानी के लिए सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए थे. सऊदी अरब की इस उपलब्धि पर पूरी इस्लामिक दुनिया बधाई दे रही है.
अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी ब्यूरो के मुताबिक, सऊदी अरब अक्टूबर 2030 से मार्च 2031 के बीच वर्ल्ड एक्सपो 2030 की मेजबानी करेगा. अरब दुनिया खासकर सऊदी अरब जिस तरह से इस मेजबानी को एक बड़ी उपलब्धि बता रहा है, ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण हो जाता है कि तेल के भंडार पर बैठे सऊदी अरब वर्ल्ड एक्सपो से क्या हासिल करना चाहता है? और इसके लिए क्यों एड़ी-चोटी का जोड़ लगाए हुए था?
वर्ल्ड एक्सपो 2030 सऊदी अरब के लिए कितना अहम?
वर्ल्ड एक्सपो एक बहुत ही पुराना और समृद्ध वैश्विक मंच है, जिसका आयोजन हर पांच साल में किया जाता है. इसकी शुरुआत 1851 में हुई थी. वर्ल्ड एक्सपो को इंटरनेशनल रजिस्टर्ड एग्जिबिशन के नाम से भी जाना जाता है. इसमें दुनिया भर के देश अपने उत्पाद, तकनीक, और शिल्प-कलाओं का प्रदर्शन करते हैं.
वर्ल्ड एक्सपो की अहमियत इससे भी समझी जा सकती है कि इसने कई अंतरराष्ट्रीय निर्णयों को प्रभावित किया है. इस मेगा इवेंट को देखने के लिए दुनिया भर से लाखों लोग आते हैं.
सऊदी अरब ने इसकी मेजबानी हासिल करने के लिए जो बोली लगाई थी, वह- 'द एरा ऑफ चेंजः टुगेदर फॉर अ फॉरसाइटेड टुमॉरो' है. यानी 'परिवर्तन का युगः एक दूरदर्शी कल के लिए एक साथ'. सऊदी अरब बड़े पैमाने पर इसकी तैयारी कर रहा है. सऊदी सरकार को उम्मीद है कि इस मेगा इवेंट में लगभग 40 लाख लोग शामिल होंगे.

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