
जानिए- उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के बारे में वो खास बातें जो बनाती हैं दूसरों से अलग
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एक बार केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी उनके अनुभव की सराहना करते हुए कहा था कि सांसद और राज्यपाल के रूप में आपकी भूमिकाएं संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाने में महत्वपूर्ण रही हैं. मुझे विश्वास है कि आपका अनुभव और समझ राज्यसभा की प्रतिष्ठा बढ़ाएंगे और नए मील के पत्थर गढ़ेंगे.
एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन बतौर राज्यपाल और नेता कई मायनों में अलग पहचान रखते हैं. जहां कई राज्यों के राज्यपाल लगातार विवाद और टकराव की वजह से सुर्खियों में रहे, वहीं राधाकृष्णन ने चुपचाप और सादगी से अपनी जिम्मेदारियां निभाईं. आइए जानते हैं वो 3 बातें जो सीपीआर (CPR) को सबसे अलग बनाती हैं.
लंबी दौड़ के खिलाड़ी, राजनीति में भी ‘मैराथन रनर’
सीपी राधाकृष्णन असल जिंदगी में भी लंबी दौड़ के खिलाड़ी हैं. जैसे खिलाड़ी मैदान पर दौड़ते वक्त मुंह से बेवजह बोलने की बजाय सांस लेते हैं, वैसे ही राधाकृष्णन ने भी बिना विवादों में उलझे, चुपचाप अपने काम किए. यही वजह है कि जहां कई राज्यपाल राज्यों की सरकारों से भिड़ंत की वजह से चर्चा में रहे, वहीं राधाकृष्णन ने शांत रहकर अपनी जिम्मेदारी निभाई.
राजनीति की लंबी दौड़ लगाने वाले राधाकृष्णन को अब बीजेपी ने एनडीए की तरफ से उपराष्ट्रपति पद के लिए नामित किया है. रविवार को बीजेपी संसदीय बोर्ड ने उनके नाम पर मुहर लगाई.
68 साल के राधाकृष्णन दो बार कोयंबटूर से सांसद रह चुके हैं और तमिलनाडु बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं. चार दशक से ज़्यादा का राजनीतिक अनुभव और पार्टी के साथ गहरी जुड़ाव उन्हें इस पद के लिए स्वाभाविक दावेदार बनाता है.
उपराष्ट्रपति पद इसलिए भी अहम है क्योंकि इस पद पर बैठा नेता राज्यसभा का सभापति भी होता है. ऐसे में सदन की कार्यवाही को गरिमा के साथ चलाने के लिए अनुभव और साख दोनों ज़रूरी हैं. दिलचस्प यह है कि राधाकृष्णन की छवि विपक्ष में भी अच्छी है. कभी डीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने उन्हें लेकर कहा था, 'अच्छे आदमी हैं, बस गलत पार्टी में हैं.' ये वही समय था जब राधाकृष्णन दूसरी बार लोकसभा पहुंचे थे और इसमें डीएमके का समर्थन भी शामिल था.

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