जातिगत सर्वे की रिपोर्ट बिना सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों के, इतनी हड़बड़ी क्यों?
AajTak
बिना सामाजिक आर्थिक आंकड़ों के जाति सर्वे की रिपोर्ट पेश करने की इतनी जल्दीबाजी क्यों की बिहार सरकार ने. डेढ महीने और इंतजार करके पूरी रिपोर्ट पेश करने से सर्वे को लेकर लोगों का भरोसा बढता. आरोप तो लगेंगे ही.
बिहार के सीएम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जातिगत सर्वेक्षण के नतीजों को जनता के सामने लाकर खूब वाह वाही बटोरी है. क्योंकि बिहार ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है. तमिलनाडु, कर्नाटक और यहां तक कि केंद्र सरकार (सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना 2011) ने भी अतीत में जाति डेटा एकत्र किया लेकिन परिणामों को सामने लाने का साहस कोई नहीं कर सका.हालांकि बिना सामाजिक और आर्थिक आंकड़ों के सामने आने तक यह प्रयास अधूरा ही कहा जाएगा. सही मायने में समाज में हाशिए पर बैठे लोगों को न्याय तभी मिल सकेगा जब सामाजिक और आर्थिक आंकड़ों के सात जाति सर्वे की रिपोर्ट प्रकाशित होगी. बताया जा रहा है कि सामाजिक और आर्थिक आंकड़ों के साथ रिपोर्ट पेश होने में करीब डेढ से 2 महीने अभी और लगेंगे.
इतनी हड़बड़ी क्यों दिखाई बिहार सरकार ने
बिहार सरकार की ओर से सर्वेक्षण के आर्थिक नतीजों को रोकने का कोई कारण नहीं बताया गया.पर इतना क्लियर हो रहा है कि स्टेप बाई स्टेप रिपोर्ट पेश करने का माजरा यही है कि जातियों की जनगणना के मुद्दे को आगामी चुनावों तक जीवित रखा जाए. जातिगत सर्वे की रिपोर्ट भी जिस तरह से सामने रखी गई उसको लेकर पूर्व में कोई जानकारी नहीं दी गई. अचानक बिहार सरकार के कुछ अफसर पीसी बुलाते हैं और रिपोर्ट को सामने रख देते हैं. कायदे से तो यह होना चाहिए था कि विधानसभा सत्र में इसे रखा जाता .इस पर विधानसभा में बहस भी हो जाती. ये भी नहीं होता तो कम से कम एक दिन पहले टाइम बता दिया जाता. पर सब कुछ इतनी जल्दी बाजी में होना ही इसे शक के दायरे में रख देता है. बिना सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण के आधी अधूरी रिपोर्ट पेश करने की अभी जरूरत ही क्या थी. डेढ़ महीने का इंतजार नहीं कर सकती थी बिहार सरकार? क्या जातिगत जनगणना और ओबीसी के हितों की बात करते हुए राहुल गांधी पिछड़ों के हितैषी न बन जाएं इसलिए नीतीश सरकार ने हड़बड़ी की या कुछ और ही बात है जिसे छुपा रही है सरकार ?
क्या मनमुताबिक डेटा नहीं होने के चलते टाला गया
कुछ राजनीतिक विश्वलेषकों का कहना है कि हो सकता है कि सर्वे के आंकड़े ऐसे न हो जो नीतीश सरकार के इच्छाओं के अनुकूल हो. इसलिए जानबूझकर सामाजिक और आर्थिक सर्वे की रिपोर्ट को कुछ दिनों के लिए टाल दिया गया हो. अभी भी कई तरह के आरोप लग रहे हैं. कई आंकड़ों को गलत बताया जा रहा है. सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने सवाल उठाया है कि कैसे भूमिहार लोगों की आबादी कुर्मी आबादी से कम हो सकती है. कुशवाहा कह रहे हैं कि हमारी आबादी तो कुर्मियों से दोगुनी होगी और हमें कम दिखाया गया है. कायस्थों का कहना है कि हम तो हैं ही नहीं. बिहार को नजदीक से देखने वाले भी कह रहे हैं कि कास्ट सेंसस के कई आंकड़े ग्राउंड पर वैसे नहीं दिखते जैसी रिपोर्ट में है .लोक जनशक्ति पार्टी राम विलास के मुखिया चिराग पासवान का कहना है कि सर्वे में पक्षपात किया गया है. कुछ जातियों को बढ़ा चढ़ा कर दिखाया गया है जबकि कुछ को जानबूझकर कम बताया गया है. पासी जाति को कम करके बताया गया है. उन्होंने इस सर्वे को एक घोटाला बताया है. सामाजिक और आर्थिक सर्वे को डेढ़ महीने बाद सामने लाने की बात इस तरह के कई आरोपों को बल दे रहे हैं.
90 सालों में बहुत सी जातियों की हैसियत बदली है

Guna Hawala Scandal: गुना का हाईप्रोफाइल हवाला कांड अब एक नई करवट ले रहा है. जहां एक तरफ ट्रेनी IPS आयुष जाखड़ की जांच टीम गुजरात के व्यापारी को बयान के लिए बुला रही है, वहीं दूसरी तरफ निवर्तमान एसपी अंकित सोनी के तबादले ने शहर में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. 'लेडी सिंघम' हितिका वासल ने कमान संभाल ली है, लेकिन अंकित सोनी के समर्थन में हिंदू संगठन सड़कों पर उतर आए हैं.

इजरायल अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है, इस युद्ध के चलते भारत में भी ऊर्जा संकट पैदा हो रहा था, इसी संकट को लेकर पीएम मोदी ने आज संसद में पहली बार सार्वजनिक तौर पर बयान दिया. पश्चिम एशिया में जंग के हालातों पर पीएम मोदी ने लोकसभा में 25 मिनट की स्पीच दी उन्होंने कहा कि तनाव खत्म होना चाहिए. बातचीत से ही समस्या का समाधान है. पीएम ने कहा कि नागरिकों और पावर प्लांट पर हमले मंजूर नहीं हैं. होमुर्ज का रास्ता रोकना स्वीकार नहीं होगा ‘सरकार की कोशिश है कि देश में तेल-गैस संकट न हो. इसके लिए 27 की जगह अब 41 देशों से इंपोर्ट कर रहे हैं. पश्चिम एशिया में एक करोड़ भारतीय रहते हैं. उनकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है.

हैदराबाद में आगामी रामनवमी शोभा यात्रा को लेकर गोशामहल के विधायक टी. राजा सिंह ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि साल 2010 से लगातार शोभा यात्रा आयोजित की जा रही है, लेकिन हर साल पुलिस की ओर से बाधाएं खड़ी की जाती हैं. उनका आरोप है कि सिदंबर बाजार, पुराना पुल और बेगम बाजार जैसे इलाकों में विशेष रूप से लाठीचार्ज के लिए टास्क फोर्स तैनात की जाती है. साथ ही उन्होंने दावा किया कि हर साल उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाती है और इस बार भी पुलिस अपनी गलतियों का ठीकरा उन पर फोड़ सकती है.










