
जस्टिस यशवंत वर्मा पहले नहीं, इन 5 जजों के खिलाफ भी शुरू हुई थी महाभियोग कार्यवाही, जानें क्या हुआ अंजाम
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साल 2015 में राज्यसभा के 58 सदस्यों ने गुजरात हाई कोर्ट के जस्टिस जे.बी. पारदीवाला के खिलाफ आरक्षण के मुद्दे पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था. सांसदों ने जस्टिस पारदीवाला पर अनुसूचित जाति और जनजाति के खिलाफ अपशब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाया था.
नोटकांड में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. केंद्र सरकार जस्टिस वर्मा के खिलाफ संसद के अगले सत्र में महाभियोग प्रस्ताव लेकर आएगी और इसे लेकर राजनीतिक सहमति बनाई जा रही है. दिल्ली में बीते दिनों इसे लेकर बैठकों का लंबा दौर चला, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा शामिल रहे.
5 जजों के खिलाफ आ चुका है प्रस्ताव
जस्टिस वर्मा के खिलाफ अगर महाभियोग चलाया जाता है तो वह ऐसे छठे न्यायाधीश होंगे, जिन्हें इस प्रक्रिया से गुजरना होगा. उनसे पहले जस्टिस वी. रामास्वामी, जस्टिस सौमित्र सेन, जस्टिस एस.के. गंगेले, जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा महाभियोग की प्रक्रिया का सामना कर चुके हैं. हालांकि अब तक लाए गए सभी महाभियोग प्रस्तावों का कोई नतीजा नहीं निकल सका है.
पहली बार साल 1993 में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस वी. रामास्वामी के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिनपर वित्तीय अनियमिताओं के आरोप थे. यह प्रस्ताव लोकसभा में लाया गया था, लेकिन जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा और प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई थी.
इसके बाद भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस सौमित्र सेन के खिलाफ साल 2011 में राज्य सभा में महाभियोग प्रस्ताव पारित किया गया था और इसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था और प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी. वह पहले ऐसे न्यायाधीश थे जिन पर उच्च सदन की ओर से महाभियोग प्रक्रिया शुरू की गई थी.
बयान वापस लेने पर रुकी कार्यवाही

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