
जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा, 90 विधानसभा सीट... जानें केंद्र के प्लान में क्या-क्या बदलाव संभव
AajTak
जम्मू कश्मीर के भविष्य को लेकर 24 को अहम बैठक होने वाली है. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों से बात करेंगे.
लद्दाख से अलग होने के बाद केंद्र शासित प्रदेश से राज्य बनाए जाने की प्रक्रिया में जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) विधान सभा को सात और सीटें मिलने के आसार बन रहे हैं. इससे राज्य की प्रस्तावित विधानसभा में पहले की 83 सीटों के मुकाबले 90 सीटें हो सकती हैं. अनुच्छेद 370 और 35A को निरस्त करने से पहले जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 87 सीट थीं. इसमें जम्मू इलाके से 37 सीटें, कश्मीर से 46 सीटें और लद्दाख से 04 उम्मीदवार आते थे. जब 5 अगस्त 2019 में लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया तब जम्मू-कश्मीर विधानसभा की कुल संख्या घटकर 83 हो गई.
आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









