
जमानत और आर्थिक अपराधों से जुड़े केस... CJI चंद्रचूड़ ने अपने कार्यकाल में इन मामलों पर किया फोकस
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सीजेआई चंद्रचूड़ ने अपने लास्ट वर्किंग डे (8 नवंबर) पर स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या 82,000 तक पहुंच जाने के पीछे असली कारण ये है कि नवंबर 2022 से पहले, अनरजिस्टर्ड/दोषपूर्ण मामलों को कभी भी सार्वजनिक डोमेन में नहीं रखा गया, लेकिन इन मामलों का लेखा-जोखा उनके कार्यकाल में रखा जाने लगा.
भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल 10 नवंबर (कल) को समाप्त हो रहा है. हालांकि शुक्रवार (8 नवंबर) को उनका 'लास्ट वर्किंग डे' था. अपने कार्यकाल में उन्होंने पब्लिक लिबर्टी, संवैधानिक व्याख्याओं से संबंधित लंबित मामलों और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित केसों पर फोकस किया. नवंबर 2022 से नवंबर 2024 तक सुप्रीम कोर्ट ने 1,11, 498 नए केसों की सुनवाई की और 1,07, 403 मामलों का निपटारा किया.
व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामलों को प्राथमिकता सुनवाई के दौरान जमानत एक ऐसा मामला होता है जिस पर बहुत ज्यादा फोकस रहता है. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के कार्यकाल के दौरान दायर 21,358 मामलों में से 21,000 केसों में जमानत दी गई थी.
आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों पर फोकस
इसी तरह सीजेआई चंद्रचूड़ के कार्यकाल में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत आर्थिक अपराध के मामलों को प्राथमिकता दी गई, जिसमें 961 मामलों में से 907 मामलों का निपटारा किया गया.
लंबित केसों के लिए अपनाई ये रणनीति
जहां तक पुराने मामलों के निपटारे का सवाल है तो साल 2019 से लंबित 10 मामलों को नियमित केसों के साथ रोजाना सूचीबद्ध किया गया.

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