
'जब सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह को बनाया था पीएम...', सीएम सिद्धारमैया के सामने 'कुर्बानी' पर बोले डीके शिवकुमार
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब कर्नाटक में CM पद की रोटेशन पर चर्चा अपने चरम पर है, ऐसे समय में शिवकुमार द्वारा त्याग की मिसाल देना कई मायनों में अहम है. इस बीच, शिवकुमार आज शुक्रवार शाम दिल्ली पहुंच सकते हैं, जहां उनकी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से मुलाकात हो सकती है.
कर्नाटक कांग्रेस सरकार के आधे कार्यकाल पूरे होते ही सत्ता परिवर्तन को लेकर खींचतान तेज हो गई है. इस राजनीतिक खींचतान के बीच उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का ताजा बयान आया है. इसमें उन्होंने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी का उदाहरण देते हुए कुर्बानी की बात कही. यह बयान उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की मौजूदगी में दिया, जिससे राजनीतिक गलियारों में नए संकेत तलाशे जा रहे हैं.
डीके शिवकुमार ने एक मंच पर बोलते हुए कहा कि सोनिया गांधी ने 20 साल तक कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में किया. उन्होंने अपनी पावर कुर्बान कर दी. जब पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने सोनिया गांधी को भारत का अगला प्रधानमंत्री बनने का प्रस्ताव दिया तो उन्होंने वह पद लेने से मना कर दिया और इसके बजाय मनमोहन सिंह को अगला प्राइम मिनिस्टर बनने का सुझाव दिया, जो इकोनॉमिक्स के एक्सपर्ट थे और देश का विकास कर सकते थे. उनके जरिए ही आशा वर्कर्स की स्कीमें लागू हुई हैं.
सोनिया गांधी का उदाहरण राजनीतिक संकेत?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब कर्नाटक में CM पद की रोटेशन पर चर्चा अपने चरम पर है, ऐसे समय में शिवकुमार द्वारा त्याग की मिसाल देना कई मायनों में अहम है. वह यह संदेश दे रहे हैं कि नेतृत्व में त्याग की परंपरा कांग्रेस की पहचान रही है और शायद वह इस परंपरा को राज्य की राजनीति में भी लागू होते देखना चाहते हैं.
बता दें कि 20 मई 2023 को विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच कड़ा मुकाबला था. दोनों के समर्थक अपने नेता के लिए सक्रिय थे, लेकिन हाईकमान ने संतुलन साधते हुए सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया.
इसी दौरान यह भी खबर आई थी कि दोनों नेताओं के बीच रोटेशनल सीएम फॉर्मूला तय हुआ, जिसके तहत 2.5 साल बाद शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाना था. हालांकि कांग्रेस ने कभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की. सिद्धारमैया ने इस फॉर्मूले को खारिज करते हुए कहा था कि वे पूरे पांच साल के लिए मुख्यमंत्री बने रहेंगे.

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