
...जब सीताराम येचुरी के चलते इंदिरा गांधी को JNU चांसलर पद से देना पड़ा था इस्तीफा
AajTak
अपने समर्थकों के बीच SRY के नाम से लोकप्रिय येचुरी का जन्म 12 अगस्त 1952 को मद्रास में हुआ था. उनके पिता एक इंजीनियर थे, जबकि उनकी मां एक सरकारी अधिकारी थीं. आंध्र प्रदेश में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें अलग तेलंगाना राज्य के लिए आंदोलन के कारण दिल्ली जाना पड़ा.
ये बात अक्टूबर 1977 की है, जब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के सैकड़ों छात्रों ने तत्कालीन छात्रसंघ अध्यक्ष सीताराम येचुरी के नेतृत्व में इंदिरा गांधी के निवास पर एक मार्च निकाला और JNU के चांसलर पद से उनके इस्तीफे की मांग की. प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर अड़े रहे. उन्होंने झुकने से इनकार कर दिया. इसके बाद इंदिरा गांधी अपने निवास से बाहर आईं. तब सीताराम येचुरी ने मजबूती के साथ इंदिरा गांधी के इस्तीफे की मांग करते हुए एक ज्ञापन पढ़ा और इंदिरा उनके बगल में खड़ी रहीं. इस प्रदर्शन का नतीजा ये हुआ कि इंदिरा गांधी ने कुछ दिनों बाद चांसलर के पद से इस्तीफा दे दिया.
यहीं से येचुरी के राजनीतिक करियर की शुरुआत हुई और उसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा, क्योंकि वे दिल्ली में सीपीआई (एम) का सबसे लोकप्रिय चेहरा बन गए थे. सौम्य और मिलनसार मार्क्सवादी नेता सीताराम येचुरी के राजनीतिक मतभेदों के बाद दूसरी पार्टियों के नेताओं के साथ अच्छे संबंध थे. सीपीआई (एम) महासचिव सीताराम येचुरी का 12 सितंबर को 72 वर्ष की आयु में दिल्ली के AIIMS में निधन हो गया.
अपने समर्थकों के बीच SRY के नाम से लोकप्रिय येचुरी का जन्म 12 अगस्त 1952 को मद्रास में हुआ था. उनके पिता एक इंजीनियर थे, जबकि उनकी मां एक सरकारी अधिकारी थीं. आंध्र प्रदेश में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें अलग तेलंगाना राज्य के लिए आंदोलन के कारण दिल्ली जाना पड़ा. अकादमिक रूप से होनहार छात्र, येचुरी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई पूरी की. यहीं उनकी पहली मुलाकात साथी कम्युनिस्ट प्रकाश करात से हुई.
1975 में येचुरी ने जेएनयू से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की. बहुत कम उम्र से ही येचुरी कम्युनिस्ट आंदोलन से प्रभावित थे. जेएनयू में ही येचुरी ने राजनीति का ककहरा सीखा और 1974 में वे सीपीआई(एम) की स्टूडेंट विंग स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) में शामिल हो गए. वास्तव में येचुरी एसएफआई के पहले अध्यक्ष थे, जो पश्चिम बंगाल या केरल से नहीं थे, जो उस समय वाम मोर्चे का गढ़ था. वह 1975 में सीपीआई(एम) में शामिल हुए.
हालांकि आपातकाल लागू होने के बाद भूमिगत हो जाने के कारण वामपंथी नेता को अपनी पीएचडी छोड़नी पड़ी. बाद में उन्हें प्रतिरोध आंदोलन की योजना बनाने के लिए गिरफ्तार कर लिया गया. आपातकाल हटने के बाद येचुरी 1977 और 1978 के बीच तीन बार जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष बने. वे पार्टी में तेजी से आगे बढ़े और 32 साल की उम्र में सीपीएम की केंद्रीय समिति के सदस्य और 40 साल की उम्र में पोलित ब्यूरो (सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था) के सदस्य बने
सीताराम येचुरी ने 2015 में सीपीआई(एम) की कमान संभाली, जब पार्टी 34 साल में पहली बार पश्चिम बंगाल में सत्ता खोने के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर थी. पार्टी 25 साल तक राज्य पर शासन करने के बाद 2018 में त्रिपुरा में सरकार बनाने में भी विफल रही.

Guna Hawala Scandal: गुना का हाईप्रोफाइल हवाला कांड अब एक नई करवट ले रहा है. जहां एक तरफ ट्रेनी IPS आयुष जाखड़ की जांच टीम गुजरात के व्यापारी को बयान के लिए बुला रही है, वहीं दूसरी तरफ निवर्तमान एसपी अंकित सोनी के तबादले ने शहर में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. 'लेडी सिंघम' हितिका वासल ने कमान संभाल ली है, लेकिन अंकित सोनी के समर्थन में हिंदू संगठन सड़कों पर उतर आए हैं.

इजरायल अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है, इस युद्ध के चलते भारत में भी ऊर्जा संकट पैदा हो रहा था, इसी संकट को लेकर पीएम मोदी ने आज संसद में पहली बार सार्वजनिक तौर पर बयान दिया. पश्चिम एशिया में जंग के हालातों पर पीएम मोदी ने लोकसभा में 25 मिनट की स्पीच दी उन्होंने कहा कि तनाव खत्म होना चाहिए. बातचीत से ही समस्या का समाधान है. पीएम ने कहा कि नागरिकों और पावर प्लांट पर हमले मंजूर नहीं हैं. होमुर्ज का रास्ता रोकना स्वीकार नहीं होगा ‘सरकार की कोशिश है कि देश में तेल-गैस संकट न हो. इसके लिए 27 की जगह अब 41 देशों से इंपोर्ट कर रहे हैं. पश्चिम एशिया में एक करोड़ भारतीय रहते हैं. उनकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है.

हैदराबाद में आगामी रामनवमी शोभा यात्रा को लेकर गोशामहल के विधायक टी. राजा सिंह ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि साल 2010 से लगातार शोभा यात्रा आयोजित की जा रही है, लेकिन हर साल पुलिस की ओर से बाधाएं खड़ी की जाती हैं. उनका आरोप है कि सिदंबर बाजार, पुराना पुल और बेगम बाजार जैसे इलाकों में विशेष रूप से लाठीचार्ज के लिए टास्क फोर्स तैनात की जाती है. साथ ही उन्होंने दावा किया कि हर साल उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाती है और इस बार भी पुलिस अपनी गलतियों का ठीकरा उन पर फोड़ सकती है.










