
छात्राओं से यौन शोषण मामले में कोर्ट ने टीचर को सुनाई 5 साल की सजा, कहा- शिक्षक को ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वर समझते हैं और...
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टीचर को सजा सुनाते हुए कोर्ट ने कहा- "हमारे समाज में अभी भी परिवार द्वारा बालिका शिक्षा का पूरी तरह से समर्थन नहीं किया जाता है और जब इस तरह की घटनाएं होती हैं, तो माता-पिता बेटियों को स्कूल भेजने में और डरने लगते हैं."
मुंबई की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को एक शिक्षक को 10-11 वर्ष की आयु के चार छात्राओं के यौन शोषण के लिए 5 साल की जेल की सजा सुनाई. इस दौरान कोर्ट ने कहा- भारतीय समाज ने एक शिक्षक को 'ब्रह्मा', 'विष्णु' और 'महेश्वर' के समझे जाने की बात भी कही. विशेष न्यायाधीश नाजेरा शेख ने 35 वर्षीय शिक्षक, चारुदत्त बोरोले को सजा सुनाते हुए कहा कि "यह शिक्षक का कर्तव्य है कि वह विद्यार्थियों की ऐसी देखभाल करे जैसे एक माता-पिता अपने बच्चों की करते हैं." न्यायाधीश शेख ने कहा कि बोरोले एक शिक्षक थे, "जब वे स्कूल में थे तब वह पीड़ितों के गार्जियन थे. शिक्षक होने के नाते फायदा उठाते हुए उन्होंने छात्राओं का यौन शोषण किया.
न्यायाधीश शेख ने आगे कहा कि छात्रों पर यौन हमले की ऐसी घटनाएं अन्य लड़कियों के शिक्षा लेने के अवसर को प्रभावित करती हैं. इस मामले में पीड़ितों ने अपराध की रिपोर्ट करने का साहस जुटाया है. आदेश में कहा गया है, "हमारे समाज में अभी भी परिवार द्वारा बालिका शिक्षा का पूरी तरह से समर्थन नहीं किया जाता है और जब इस तरह की घटनाएं होती हैं, तो माता-पिता बेटियों को स्कूल भेजने में और डरने लगते हैं." आदेश में कहा गया है, "ब्रह्मा के रूप में शिक्षक, ज्ञान , समझ और शिक्षा पैदा करता है .अनुशासन और बौद्धिकता लाता है उन्हें अपने जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाया जा सके. विष्णु के रूप में सिखाने का काम करता है. वहीं महेश्वर के रूप में, वह अज्ञानता को नष्ट कर देता है."
अभियोजन पक्ष का मामला यह है कि बोरोले गणित और विज्ञान पढ़ाते थे और चार पीड़ित लड़कियों के साथ उन्होंने छेड़छाड़ की थी, जो उस समय नवंबर 2015 और मार्च 2016 के बीच स्कूल परिसर में कक्षा 5 और 6 में पढ़ रही थीं. मामला तब सामने आया जब लड़कियों में से एक ने अपनी मां को बताया कि बोरोले ने अपना हाथ उसके सीने पर रखा था और एक महीने पहले उसने उसकी जांघ को छुआ था. लड़की ने कहा कि उसने एक अन्य शिक्षिका मिनाक्षी भोराडे को इस बारे में सूचित किया था जिसने पीड़िता को इस बात को खत्म करने के लिए कहा था. बच्ची की मां ने इसको लेकर अन्य अभिभावकों से बात की और स्कूल में शिकायत दर्ज कराई लेकिन जब कोई कार्रवाई होती नजर नहीं आई तो उसने प्राथमिकी दर्ज करा दी. उन्हें यह भी पता चला कि इसी तरह की घटनाएं उनके बच्चों के साथ भी हुई थीं.

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