
युद्ध क्षेत्र में जहाज उड़ाना खतरनाक, पायलटों ने मांगा 'वॉर रिस्क इंश्योरेंस', DGCA को लिखा पत्र
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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच इंडियन पायलट एसोसिएशन ने पायलटों, क्रू और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है. डीजीसीए से वॉर रिस्क इंश्योरेंस अनिवार्य करने और खाड़ी देशों की उड़ानें रोकने की मांग की गई है.
भारत में पायलट एसोसिएशन ने अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच पश्चिम एशियाई देशों की उड़ानों को लेकर गंभीर चिंता जताई है और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से एयरलाइंस कंपनियों को ‘वॉर रिस्क इंश्योरेंस’ लागू करने के निर्देश जारी करने की मांग की है. पायलट एसोसिएशन का कहना है कि एयरलाइंस कंपनियों अभी जो इंश्योरेंस पॉलिसी देती हैं, उसमें 'वॉर रिस्क' शामिल नहीं होता है. उनका कहना है कि युद्ध जैसी स्थिति में अतिरिक्त सुरक्षा कवर जरूरी है ताकि क्रू और उनके परिवारों को भरोसा मिल सके.
एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने डीजीसीए से खाड़ी देशों के लिए सभी उड़ानों पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है. एसोसिएशन के प्रेसिडेंट कैप्टन सैम थॉमस के मुताबिक, युद्धग्रस्त क्षेत्र में विमानों को उड़ान की अनुमति देना पायलटों और यात्रियों की सुरक्षा के साथ गंभीर समझौता है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब ड्रोन और मिसाइल हमले लगातार हो रहे हैं, तो ऐसे में उड़ानों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है.
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पायलट एसोसिएशन का कहना है कि इस क्षेत्र के फ्लाइट रूट्स का कोई रिस्क एनालिसिस नहीं किया गया है. साथ ही, युद्ध की स्थिति में इंश्योरेंस कवरेज को लेकर भी स्पष्टता नहीं है. पायलटों का कहना है कि वे ड्यूटी से इनकार नहीं कर सकते, क्योंकि इससे उनके करियर पर असर पड़ सकता है, जिससे उनकी सुरक्षा और चिंता बढ़ जाती है. इस बीच, एयर इंडिया को हाल ही में दिए गए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) में छूट को लेकर भी विवाद बढ़ गया है.
डीजीसीए ने 13 मार्च से 30 अप्रैल तक पायलटों की फ्लाइट ड्यूटी टाइमिंग में 90 मिनट की बढ़ोतरी की अनुमति दी थी, जिससे एक पायलट के लिए अधिकतम फ्लाइट ड्यूटी टाइमिंग 11 घंटे 30 मिनट हो गई है. फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स के प्रेसिडेंट कैप्टन सी.एस. रंधावा ने DGCA को पत्र लिखकर इस फैसले की समीक्षा की मांग की है. उन्होंने कहा कि पायलटों की थकान (फटीग) फ्लाइट सिक्योरिटी के लिए बड़ा खतरा बन सकती है.

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