
ग्रेटर नोएडा: आयुर्वेदिक दवा बनाने वाली कंपनी पर अथॉरिटी का एक्शन, प्लॉट आवंटन निरस्त
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UP News: ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने आयुर्वेदिक मेडिसिन बनाने वाली कंपनी एमजी कैप्सूल के प्लॉट का आवंटन निरस्त कर दिया है. कंपनी की तरफ से समय पर प्रीमियम का भुगतान नहीं किया गया था, जिस पर अथॉरिटी ने नोटिस जारी किया.
ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने आयुर्वेदिक मेडिसिन बनाने वाली कंपनी एमजी कैप्सूल को सेक्टर ईकोटेक वन एक्सटेंशन वन में आवंटित प्लॉट का आवंटन निरस्त कर दिया है. कंपनी पर प्लॉट आवंटन के प्रीमियम और लीज डीड विलंब शुल्क के रूप में करीब 13 करोड़ रुपए बकाया था. अथॉरिटी की तरफ से कई बार नोटिस जारी करने के बावजूद कंपनी कोई जबाब नहीं दे रही थी. जिस पर कार्रवाई करते हुए अथॉरिटी ने प्लॉट आवंटन निरस्त कर दिया.
दरअसल, आयुर्वेदिक मेडिसिन बनाने वाली कंपनी एमजी कैप्सूल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने ग्रेटर नोएडा में प्लॉट के लिए आवेदन किया था. अथॉरिटी ने कंपनी को जनवरी 2019 में सेक्टर ईकोटेक वन एक्सटेंशन वन में (प्लॉट संख्या -08) 30807 वर्ग मीटर जमीन आवंटित कर दी. अथॉरिटी ने कंपनी को लीज डीड कराने के लिए चेक लिस्ट भी जारी कर दी. कंपनी की तरफ से समय पर प्रीमियम का भुगतान नहीं किया गया, जिस पर अथॉरिटी ने नोटिस जारी किया.
इसके बावजूद कंपनी ने भुगतान नहीं किया. अथॉरिटी ने नोटिस जारी कर बकाया भुगतान करने के लिए 15 दिन का समय दिया. इसके बाद कंपनी ने सिर्फ डेढ़ करोड़ रुपये जमा कराते हुए शेष धनराशि दो से तीन माह में जमा करने का समय मांगा. जिस पर अथॉरिटी ने बकाया प्रीमियम धनराशि को तीन किस्तों में भुगतान की अनुमति दे दी. लेकिन कंपनी पहली ही किस्त का पूरा भुगतान नहीं कर सकी. अथॉरिटी ने एक बार फिर कंपनी को पहली किस्त को जमा करने के लिए एक सप्ताह का समय दे दिया. इसके बाद भी कंपनी बकाया भुगतान नहीं कर पाई.
इस कारण 15 अप्रैल तक कंपनी पर प्रीमियम की राशि 11.30 करोड़ और लीज डीड विलंब शुल्क के रूप में 1.69 करोड़ रुपए बकाया हो गया. ऐसे में अथॉरिटी ने आवंटन निरस्त कर दिया. ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ दीप चंद्र ने बताया कि कई बार अवसर देने के बावजूद बकाया धनराशि जमा न करने पर अथॉरिटी ने कंपनी का आवंटन निरस्त कर दिया.
ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ सुरेंद्र सिंह ने बताया कि अथॉरिटी से जमीन प्राप्त करने के बाद तय समय में प्रीमियम न जमा करने या फिर उद्योग न लगाने पर इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी. उद्योगों के लगने से निवेश बढ़ता है और यहां के युवाओं को रोजगार के अवसर मिलते हैं. ऐसे में प्लॉट लेकर बैठे रहने का अवसर किसी को नहीं दिया जाएगा. ऐसे भूखंडों का आवंटन निरस्त कर उद्योग लगाने वाले किसी और उद्यमी को स्कीम के जरिए ये आवंटित किया जाएगा. सभी विभागों (औद्योगिक, संस्थागत, वाणिज्यिक, आईटी, आवासीय आदि) को ऐसे भूखंडों को चिह्नित कर आवंटन निरस्त करने के निर्देश दिए गए हैं.

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