
गाजा में युद्ध विराम पर फंसा पेच! हमास ने सीजफायर प्रपोजल में की संशोधन की मांग, US का मानने से इनकार
AajTak
हमास ने कहा कि वह फिलिस्तीनी कैदियों की एक निश्चित संख्या के बदले में 10 जीवित बंधकों को रिहा करेगा और 18 अन्य के शवों को लौटाएगा. इजरायल में 7 अक्टूबर, 2023 के हमले के दौरान हमास द्वारा पकड़े गए 250 बंधकों में से 58 गाजा में जीवित हैं, जबकि इजरायल का मानना है कि 35 बंधक मर चुके हैं.
हमास ने गाजा में युद्धविराम के लिए अमेरिकी प्रस्ताव को मंजूर नहीं किया है. उसकी ओर से प्रस्ताव में संशोधन की मांग की गई है. इजरायल इस युद्धविराम प्रस्ताव को अपना समर्थन दे चुका था. वार्ता की संवेदनशीलता के कारण नाम न बताने की शर्त पर हमास के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि प्रस्तावित संशोधन 'अमेरिकी गारंटी, बंधकों की रिहाई का समय, मानवीय सहायता की आपूर्ति और इजरायली सेना की वापसी' पर केंद्रित हैं. हमास के एक अलग बयान में गाजा में स्थायी युद्धविराम, इजरायली सेना की गाजा से पूर्ण वापसी और मानवीय सहायता के प्रवाह को सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया.
हमास ने कहा कि वह फिलिस्तीनी कैदियों की एक निश्चित संख्या के बदले में 10 जीवित बंधकों को रिहा करेगा और 18 अन्य के शवों को लौटाएगा. इजरायल में 7 अक्टूबर, 2023 के हमले के दौरान हमास द्वारा पकड़े गए 250 बंधकों में से 58 गाजा में जीवित हैं, जबकि इजरायल का मानना है कि 35 बंधक मर चुके हैं. हालांकि, इस युद्धविराम प्रस्ताव की रूपरेखा तैयार करने वाले अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने हमास की प्रतिक्रिया को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि अमेरिकी प्रस्ताव में 60 दिनों का युद्धविराम, जीवित बंधकों की रिहाई और मृत बंधकों के शवों की वापसी शामिल है.
यह भी पढ़ें: 'गाजा के जख्म ताजा हैं, अब पानी को बनाया हथियार...', सिंधु समझौते को गाजा से जोड़ा, मेजबान के सामने शहबाज की कुटिल चाल
विटकॉफ ने हमास से आग्रह किया कि वह इस रूपरेखा को वार्ता के लिए प्रारंभिक बिंदु के रूप में स्वीकार कर ले, जो अगले सप्ताह से शुरू हो सकती है. इजरायली अधिकारियों ने गाजा में युद्धविराम के लिए अमेरिकी प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दे दी थी, जिसके आधार पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि लगभग 20 महीने के संघर्ष के बाद इजरायल और हमास युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौते के करीब हैं.
गाजा में हताशा और सहायता संकट
यूएन वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने एक बयान में कहा कि जैसे-जैसे गाजा में भुखमरी बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. इस अंतरराष्ट्रीय संस्था ने बताया कि गाजा में फिलिस्तीनियों ने संयुक्त राष्ट्र के 77 सहायता ट्रकों को रोककर खाली कर दिया, जिनमें से अधिकांश आटे से भरे थे, इससे पहले कि राहत आपूर्ति उनके गंतव्य तक पहुंच पाती. खान यूनिस में एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि हजारों नागरिक एक अस्थायी बैरिकेडिंग पर सहायता सामग्री उतार रहे थे. डब्ल्यूएफपी ने गंभीर अकाल की आशंका की चेतावनी दी है और कहा है कि उसके पास 140,000 मीट्रिक टन से अधिक खाद्यान्न है, जो गाजा को दो महीने तक खिलाने के लिए पर्याप्त है, तथा यह खाद्यान्न क्षेत्र में पहुंचने के लिए तैयार है, लेकिन असुरक्षा और प्रतिबंधों के कारण इसकी सुरक्षित डिलीवरी नहीं हो पा रही है.

जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने रविवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बिछी बारूदी सुरंगों को हटाने का प्रस्ताव रखा है. उन्होंने कहा है कि यदि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच सीजफायर हो जाता है तो जापान होर्मुज जलडमरूमध्य में बिछी समुद्री बारूदी सुरंगों (नेवल माइंस) को हटाने के लिए अपने अत्याधुनिक 'माइनस्वीपर' जहाज तैनात करेगा.

ईरान जंग से तेल $112 प्रति बैरल तक पहुंच रहा है. एयरलाइंस उड़ानें काट रही हैं. ट्रांसपोर्ट महंगा हो रहा है. जापान, दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश में फ्यूल राशनिंग शुरू हो गई है. IEA का 10-पॉइंट प्लान आ गया है. दुनियाभर की सरकारें इसे एनर्जी सिक्योरिटी कहेंगी, लेकिन असर लॉकडाउन जैसा दिखना शुरू हो चुका है. इस बार चेतावनी भी नहीं मिलेगी.

जापान ने कहा है कि अगर इजरयाल-अमेरिका का ईरान के साथ जो युद्ध जल रहा है, उसपर अगर पूरी तरह से विराम लगता है तो वह होर्मुज के रास्ते से माइंस हटाने का सोचेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो दिन पहले ही जापान के प्रधानमंत्री से मुलाक़ात की थी. इस मुलाक़ात के बाद जापान की ओर से यह बयान जारी किया गया है.

ईरान ने दक्षिण इजरायल के अराद और डिमोना में भीषण मिसाइल हमले किए है. इजरायली विदेश मंत्रालय के मुताबिक इस हमले में बच्चों समेत 100 से ज्यादा लोग घायल है. ईरान ने इन हमलों के लिए बैलिस्टिक मिसािलों का इस्तेमाल किया और डिमोनो शहर जहां इजरायल का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र के पास ये हमला हुआ, जो कि बड़ा चिंता का विषय है.









