
क्या तेजस्वी यादव ने खुद को महागठबंधन का CM चेहरा घोषित कर दिया है?
AajTak
तेजस्वी यादव अब अपनी राजनीतिक पहचान को लालू यादव की विरासत से आगे बढ़कर पेश करने लगे हैं. कांग्रेस से मुख्यमंत्री चेहरे की मंजूरी न मिलने के बाद वो खुद को बिहार चुनाव 2025 के लिए ब्रांड-तेजस्वी के रूप में पेश कर रहे हैं, और अपना नाम लेकर समझाते हैं, बिहार में बदलाव तो तेजस्वी यादव ही लाएगा.
तेजस्वी यादव के लिए लालू यादव के साये से निकल पाना काफी मुश्किल रहा है. शायद तेज प्रताप से भी ज्यादा मुश्किल. वारिस होने, और विरासत से बेदखल होने में यही फर्क होता है. तेजस्वी यादव को लालू यादव ने अपनी राजनीतिक विरासत सौंपी है, और तेज प्रताप को परिवार और पार्टी दोनों से बेदखल कर दिया है.
चुनाव मैदान में तेजस्वी और तेज प्रताप दोनों भाई अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं. तेजस्वी यादव के साथ लालू यादव हैं, तो तेज प्रताप के साथ उनका नाम है. तेज प्रताप अगर अपने दम पर विधानसभा चुनाव भी जीत लेते हैं, तो उनके लिए उपलब्धि वाली बात होगी. और, तेजस्वी यादव सब कुछ करके भी अगर बिहार के मुख्यमंत्री नहीं बन पाते तो पानी फिर जाना ही समझा जाएगा.
2020 में तो तेजस्वी यादव अपने दम पर ही चुनाव मैदान में लड़ रहे थे. क्योंकि, लालू यादव तब रांची की जेल में हुआ करते थे. चारा घोटाले में हुई सजा काटने के लिए. लेकिन, तब भी पूरे चुनाव जंगलराज का जिक्र हमेशा की तरह ही होता रहा.
तेजस्वी यादव को हर हाल में खुद को साबित करना है. साबित करना है कि वो सिर्फ लालू यादव के बेटे भर नहीं हैं, बल्कि दो बार बिहार के डिप्टी सीएम भी रह चुके हैं. अपने दूसरे कार्यकाल की उपलब्धियां तो वो गिनाते ही रहते हैं, अब तो वो खुद को ब्रांड के तौर पर भी पेश कर रहे हैं. कुछ कुछ वैसे ही जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे अरविंद केजरीवाल अपने नाम पर वोट मांगते रहे हैं.
बिहार में तो ब्रांड नीतीश कुमार 20 साल से बना हुआ है, लेकिन उनके वोट मांगने का अंदाज अलग होता है. सहयोगी बीजेपी या उनके समर्थक उनको सुशासन बाबू बताकर वोट मांगते रहे हैं, लेकिन वो अपना नाम लेने के बजाए हमेशा अपनी शासन व्यवस्था का नाम लेते हैं.
और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता फेसबुक लाइव करके कहते हैं, 'तेजस्वी सबको नौकरी देगा.'

मालदीव में 19 मार्च को हुए स्पीडबोट हादसे में गौतम सिंघानिया सुरक्षित बच गए, जबकि एक भारतीय अब भी लापता है. मालदीव पुलिस सेवा के अनुसार, वावू फेलिधू में हुई इस घटना में 7 लोग सवार थे. सिंघानिया को मामूली चोटों के बाद छुट्टी मिल गई. दो घायलों का इलाज जारी है और दो को भारत भेजा गया. पी वी सिंधु ने दो लोगों के निधन की आशंका जताई है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. हादसे की वजह की जांच जारी है.

IMD के अनुसार, इस सप्ताह उत्तर-पश्चिम भारत में तीन सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ बारिश, तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ आएंगे., जिससे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में मौसम अस्थिर रहेगा. यह स्थिति रबी फसलों जैसे गेहूं, सरसों और चना के लिए खतरा है, क्योंकि तेज हवाएं और बेमौसम बारिश फसलों को नुकसान पहुंचा सकती हैं.

'सब देखते रहे, वो गोली चलाता रहा…' वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज हत्याकांड की चश्मदीद छात्रा शिवांगी सिंह का बयान सामने आया है. उसने बताया कि बीएससी छात्र सूर्य प्रताप सिंह को बचाने की कोशिश हुई, लेकिन हमलावर दोबारा लौटकर गोली मार गया. घटना के बाद कॉलेज सुरक्षा, प्रशासन की भूमिका और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जिससे छात्रों में डर और आक्रोश का माहौल है.

E30 Petrol: ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) ने सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग 20% से बढ़ाकर 30% तक करने की मांग की है. इसके अलावा डीजल में भी एथेनॉल ब्लेंडिंग की संभावनाओं को तलाशने की बात कही जा रही है. सरकार पहले की कह चुकी है कि, एथेनॉल ब्लेंडिंग के चलते भारत ने करोड़ो बैरल कम तेल आयात किया है.

वाराणसी में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने चतुरंगिणी सेना सभा का गठन कर 27 सदस्यों की टीम बनाई और ‘रोको, टोको, ठोको’ का नारा दिया. माघ मेले की घटना के बाद शुरू हुई पहल में 10 महीने में भर्ती व प्रशिक्षण का खाका तैयार होगा. उन्होंने बताया कि संगठन का उद्देश्य सनातन प्रतीकों की रक्षा और समाज में सुरक्षा का भाव मजबूत करना है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि अमेरिका ने ईरान के पावर प्लांट पर हमले को 5 दिन तक टाल दिया है. इसके साथ ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत पर के नतीजे पर आगे का फैसला होगा. वहीं ट्रंप के इस ऐलान के बाद दुनिया के बाजारों में जबरदस्त उछाल आया है और कच्चे तेल की कीमतों में 11% की गिरावट आई है.







