
क्या PM मोदी के दौरे के चलते लेट हुआ गुजरात चुनाव का ऐलान? CEC ने दिया ये जवाब
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चुनाव आयोग ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के पक्षपात के आरोपों का भी जवाब दिया और कहा कि चुनाव आयोग 100 फीसदी निष्पक्ष है. आयोग ने माना कि मोरबी हादसे की वजह से चुनाव ऐलान में कुछ देरी हुई.
चुनाव आयोग ने गुजरात में चुनाव तारीखों की घोषणा कर दी है. गुजरात में मतदान 1 और 5 दिसंबर को होंगे और वोटों की गिनती हिमाचल प्रदेश के साथ 8 दिसंबर को होगी. इस दौरान चुनाव आयोग ने पक्षपात के कांग्रेस के आरोपों पर खुलकर जवाब दिया. आयोग से जब पूछा गया कि क्या पीएम मोदी के दौरे की वजह से गुजरात चुनाव के तारीखों की घोषणा में देरी हुई? इस पर आयोग ने कहा कि गुजरात में चुनाव की घोषणा शेड्यूल के अनुसार है.
मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा है कि शब्द से ज्यादा हमारे कदम बोलते हैं. उन्होंने कहा कि मैं आपको कितना भी बोलकर समझाने की कोशिश करूं उससे ज्यादा जरूरी है कि हमारे जो नतीजे आते हैं वो सही हैं या नहीं. अगर हम ये कहें कि चुनाव बाद के नतीजे में किसी किस्म की कमी है तो ये संभवत: मतदाताओं का बहुत बड़ा अपमान है.
बता दें कि गुजरात चुनाव की घोषणा में देरी पर कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए थे. कांग्रेस ने टिप्पणी करते हुए ट्वीट किया था कि भारत निर्वाचन आयोग एक स्वायत्त संस्थान है. ये निष्पक्ष चुनाव कराता है. इस ट्वीट के साथ ही कांग्रेस ने गांधी जी के तीन बंदरों का इमोजी भी डाला था.
गुरुवार को चुनाव आयोग ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि चुनाव की घोषणा में कई चीजों को बैलेंस करना होता है जिसमें गुजरात और हिमाचल प्रदेश की मतगणना एक साथ करने की प्रथा है, मौसम का सवाल है, आचार संहिता कितने दिनों तक लागू रहेगी इसका सवाल है. उन्होंने कहा कि गुजरात विधानसभा के कार्यकाल की आखिरी तारीख 18 फरवरी 2023 तक है. हम 110 दिन पहले चुनाव की घोषणा कर रहे है. ये काफी समय है. 8 दिसंबर से लेकर 18 फरवरी तक 72 दिनों का समय है. हमलोग ठीक शेड्यूल पर चल रहे हैं.
आपत्ति उठाने वाले खुद हैरान रह जाते हैं
चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर राजीव कुमार ने कहा कि कई बार जो पार्टियां चुनाव आयोग की आलोचना करती हैं वही आश्चर्यजनक नतीजे पाती हैं. जो भी पार्टी या कैंडिडेट किसी कारण से सवाल उठाते हैं वो चुनाव के नतीजे के बाद देखते हैं कि परिणाम उन्हीं के पक्ष में है उन्हें तो सवाल नहीं उठाना चाहिए था. कई बार पार्टियां EVM बदलने की मांग करती हैं, लेकिन वही EVM मशीन ऐसा मांग करने वाली पार्टी को ही जीता देती है तो फिर ऐसे सवाल बंद हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता हमारी विरासत है और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में इसके लिए देश को प्रशंसा मिलती है.

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