
क्या है 'मिशन मौसम', जिसे मोदी कैबिनेट ने दी है मंजूरी, कैसे करता है काम, जानिए
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भारत में मौसम और जलवायु में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की गई है. यह मिशन को केंद्रीय कैबिनेट द्वारा मंजूर भी कर लिया गया है. इस योजना का उद्देश्य देश को "मौसम के लिए तैयार" और "जलवायु स्मार्ट" बनाना है. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 2000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है.
भारत में मौसम और जलवायु में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की गई है. यह मिशन को केंद्रीय कैबिनेट द्वारा मंजूर भी कर लिया गया है. इस योजना का उद्देश्य देश को "मौसम के लिए तैयार" और "जलवायु स्मार्ट" बनाना है. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 2000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है.
मिशन मौसम के तहत, मंत्रालय का मुख्य ध्यान मौसम पूर्वानुमान में बड़े बदलाव करना है. प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को बढ़ाना और अवलोकन क्षमताओं, मॉडलिंग और पूर्वानुमान की गुणवत्ता में सुधार करना है. इस मिशन के तहत हाई परफोर्मेंस कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और रिमोट सेंसिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा. यह तकनीकें वायुमंडलीय प्रक्रियाओं की बारीक समझ हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी.
मिशन मौसम में ड्रोन, लिडार और हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग जैसी उन्नत तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा. इससे महासागरों और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अवलोकन नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा. इस पहल का उद्देश्य व्यापक सामाजिक लाभ, अधिक सटीक गंभीर मौसम की घटनाओं की भविष्यवाणी और वैश्विक स्तर पर प्रभावी मौसम प्रबंधन करना है.
मिशन मौसम से न केवल दैनिक जीवन में सुधार होगा, बल्कि कृषि, जल संसाधन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा. इस मिशन की सफलता से भारत को मौसम और जलवायु परिवर्तन से निपटने में अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाया जा सकेगा.

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