
क्या है जमात-ए-इस्लामी, जिसे बैन करना शेख हसीना को पड़ा भारी? देश छोड़ने को हुईं मजबूर
AajTak
शेख हसीना सरकार ने हाल ही में जमात-ए-इस्लामी, इसकी छात्र शाखा और इससे जुड़े अन्य संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया था. यह कदम बांग्लादेश में कई सप्ताह तक चले हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद उठाया गया था. कहा जा रहा है कि सरकार की इस कार्रवाई के बाद ये संगठन शेख हसीना सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं.
बांग्लादेश में आगजनी और भीषण हिंसा हो रही है. हालात बेकाबू हो चुके हैं. देशव्यापी कर्फ्यू को दरकिनार करते हुए प्रदर्शनारी सोमवार को बांग्लादेश के कई इलाकों में मार्च के लिए इकठ्ठा हुए थे. प्रदर्शनकारी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग कर रहे थे. इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सत्तारूढ़ पार्टी के समर्थकों के बीच झड़पें शुरू हुईं जिसने देखते ही देखते भीषण हिंसा का रूप ले लिया. माना जा रहा है कि बीते दिनों बांग्लादेश सरकार की ओर से कट्टरपंथी दल जमात-ए-इस्लामी पर लगाए गए बैन के कारण ही छात्रों का यह प्रदर्शन हिंसा में बदल गया.
प्रदर्शनकारी इतने उग्र हो गए कि उन्होंने सरकारी संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया और पीएम हाउस के भीतर घुस गए. वीडियो में प्रदर्शनकारियों को पीएम हाउस के भीतर घुसकर मौज-मस्ती करते हुए देखा जा रहा है. कुछ ऐसी ही तस्वीरें कुछ साल पहले श्रीलंका से सामने आई थीं. इतना ही नहीं कुछ लोगों को बांग्लादेश के राष्ट्रपिता कहे जाने वाले शेख मुजीब की मूर्ति पर चढ़कर हथौड़ा चलाते भी देखा गया.
शेख हसीना सरकार ने जमात-ए-इस्लामी को किया बैन
दरअसल शेख हसीना सरकार ने हाल ही में जमात-ए-इस्लामी, इसकी छात्र शाखा और इससे जुड़े अन्य संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया था. यह कदम बांग्लादेश में कई सप्ताह तक चले हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद उठाया गया था. कहा जा रहा है कि सरकार की इस कार्रवाई के बाद ये संगठन शेख हसीना सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं.
सरकार ने आतंकवाद विरोधी कानून के तहत जमात-ए-इस्लामी पर बैन लगाते हुए कट्टरपंथी पार्टी पर आंदोलन का फायदा उठाने और लोगों को हिंसा के लिए बरगलाने का आरोप लगाया था. जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाने का फैसला शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के नेतृत्व वाले 14 पार्टियों के गठबंधन की मीटिंग में लिया गया था. इस मीटिंग के दौरान कथित रूप से सहयोगी पार्टियों ने भी कट्टर पार्टी पर बैन लगाने की अपील की थी.
जमात-ए-इस्लामी क्या है?

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.










