
क्या लालू के किले पर आरजेडी को फिर से कब्जा दिला सकेंगे खेसारी लाल
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बिहार की छपरा विधानसभा सीट सबसे हॉट सीट बन गई है. यहां से भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार खेसारी लाल यादव चुनाव लड़ रहे हैं. पर यह सीट उनके लिए आसान नहीं है. क्योंकि पिछले दो दशक से यहां बीजेपी का कब्जा है. जाहिर है कि लड़ाई कठिन है.
सारण ज़िले की छपरा विधानसभा सीट. कभी लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक प्रयोगशाला रही है.अब करीब दो दशक से बीजेपी के कब्ज़े में है. यह वही इलाका है, जहां से लालू ने राजनीति की शुरुआत की और यहीं से उन्होंने ‘पिछड़ों के सामाजिक न्याय’ का नारा दिया था.
लेकिन 2005 के बाद से समीकरण बदले.नीतीश कुमार और बीजेपी गठबंधन की सामाजिक इंजीनियरिंग ने यादव–राजपूत बहुल इस क्षेत्र में नए सिरे से समीकरण गढ़ दिए. बीजेपी ने वैश्य, भूमिहार, और सवर्ण वोट को मजबूत किया, जबकि नीतीश कुमार ने अतिपिछड़ा और महिला वोट बैंक अपने पक्ष में किया.
नतीजा यह हुआ कि 2014 से लगातार राजीव प्रताप रूडी सारण लोकसभा सीट से सांसद बने रहे और सी.एन. गुप्ता जैसे उम्मीदवारों ने विधानसभा में भी भगवा झंडा फहराए रखा. पिछले दो दशक में केवल एक बारआरजेडी यहां सिर्फ एक बार (2014 के उपचुनाव में) जीत पाई.
कभी लालू यादव का गढ़ होता था छपरा कांग्रेस का वर्चस्व खत्म होने के बाद 1990 के दशक में लालू प्रसाद यादव के उदय के साथ छपरा एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गया. उदित राय ने इस क्षेत्र में राजद के समर्थन से तीन बार जीत दर्ज की और छपरा को ‘लालू का गढ़’ कहा जाने लगा. राजद के प्रभुत्व का दौर लगभग दो दशक तक कायम रहा.
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने वर्ष 1977 में यहीं से पहली बार लोकसभा का चुनाव जीता था. वर्ष 2004 और वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में लालू प्रसाद यादव ने इस सीट से चुनाव लड़ते हुए करीब 60 हजार और 52 हजार वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी. बाद में यह सीट उनके हाथ से ऐसे निकली कि एक बार उनकी पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और एक बार उनकी बेटी रोहिणी आचार्य ने भी चुनाव लड़ा पर जीत नसीब नहीं हुई.
2005 में एनडीए गठबंधन से जदयू प्रत्याशी राम प्रवेश राय ने राजद प्रत्याशी को हराकर यह सीट जीत ली और गठबंधन के दशकों पुराने किले में सेंध लगा दी. इसके बाद 2010 में भाजपा के जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने जीत दर्ज की. वर्ष 2015 से भाजपा के डा.सीएन गुप्ता विधायक है. 2010 में भाजपा के जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने छपरा सीट जीतकर लंबे समय बाद एक नया राजनीतिक अध्याय लिखा. इसके बाद 2015 और 2020 में डा. सीएन गुप्ता की जीत ने भाजपा की जड़ें और गहरी कर दीं. भाजपा को शहरी मतदाताओं और सवर्ण वर्ग का बड़ा समर्थन मिला, वहीं राजद अब भी यादव-मुस्लिम समीकरण पर भरोसा कर रहा है. दोनों खेमों ने संगठनात्मक स्तर पर कमर कस ली है.

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