
क्या झारखंड में वैक्सीन कम लग रहीं या बर्बाद ज्यादा हो रहीं? Ground Reality से समझें
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ऐसा ही एक राज्य है झारखंड जहां पर कोरोना की स्थिति जरूर पहले से बेहतर हुई है, लेकिन अभी तक यहां पर टीकाकरण की रफ्तार काफी सुस्त दिखाई पड़ रही है. अब एक तरफ केंद्र की तरफ से दावा किया गया है कि झारखंड सरकार ने अब तक 37.3% वैक्सीन बर्बाद कर दी हैं, तो वहीं राज्य ने उल्टा केंद्र के आंकड़ों पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं.
देश में इस समय कोरोना के मामले काफी कम हो गए हैं और कहा जा रहा है कि जल्द ही इसरी दूसरी लहर का प्रकोप शांत पड़ जाएगा. अब संक्रमित मरीज जरूर कम हो रहे हैं, लेकिन इस महामारी की लड़ाई में इस्तेमाल होने वाला टीका अभी भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. कई राज्यों में इस समय कोरोना वैक्सीन की कमी देखने को मिल रही है. कहीं पर वैक्सीन बर्बादी के आरोप भी लग रहे हैं. इस वजह से समाधान की जगह राजनीति जोर पकड़ रही है और वैक्सीन संकट गहराता जा रहा है. झारखंड में कोरोना वैक्सीन हो रहीं वेस्ट?
आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









