
कोरोना से निपटने की तैयारियों पर केंद्र का SC में हलफनामा, आज कोर्ट करेगा सुनवाई
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हलफनामे में सरकार ने कहा है कि वैक्सीन उत्पादकों से बात कर यह तय कर दिया गया है कि सभी राज्यों को समान दर पर वैक्सीन मिलेगी. लेकिन केंद्र को सस्ती वैक्सीन देने के पीछे वजह ये बताई गई है कि केंद्र ने बड़े ऑर्डर और पेशगी रकम कंपनी को दी है.
केंद्र सरकार ने वैक्सीनेशन के अलावा कोविड प्रबंधन की ताजा और विस्तृत जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी है. सोमवार सुबह होने वाली सुनवाई से पहले रविवार शाम 218 पेज के हलफनामे में केंद्र सरकार ने कोर्ट के सभी सवालों के एक-एक कर जवाब दिए हैं. केंद्र ने कहा है कि देशभर में कोई भी कोविड मरीज कहीं भी अस्पताल में दाखिल हो सकता है. यानी आरटीपीसीआर रिपोर्ट या राज्य शहर में रहने के आधार कार्ड की जरूरत नहीं होगी. केंद्र सरकार ने ये भी जानकारी दी है कि कोविड सेंटर, बेड्स, डॉक्टर, नर्स और मेडिकल स्टाफ की संख्या बढ़ाई गई है. मेडिकल छात्रों को भी कोविड सेवा कार्य में लगाया जा रहा है.
कोर्ट ने पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली बनाने पर जोर दिया ताकि बिना नसबंदी वाले कुत्तों की रिपोर्टिंग हो सके. 28 जनवरी को सरकारों की ओर से सॉलिसिटर जनरल अपनी दलीलें प्रस्तुत करेंगे. कोर्ट ने एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट के पॉडकास्ट पर नाराजगी जताई और मामले की गंभीरता को रेखांकित किया. ये सुनवाई आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को जाति के आधार पर अपमानित करने की स्पष्ट मंशा होनी चाहिए। पटना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एफआईआर और आरोप पत्र में जाति-आधारित अपमान के अभाव को रेखांकित किया। कोर्ट ने एससी एसटी एक्ट की धारा 3(1) के प्रावधानों को दोहराते हुए कहा कि केवल अपशब्दों का प्रयोग अपराध नहीं बनता।

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