
कोटा सिस्टम की लड़ाई, छात्रों का प्रदर्शन और आर्मी का रोल... शेख हसीना के तख्तापलट की Inside Story
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बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने देश भी छोड़ दिया है. शेख हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर कई दिनों से प्रदर्शन चल रहा था. सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने ढाका तक लॉन्ग मार्च निकालने को कहा था. ऐसे में जानते हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि शेख हसीना को पद से हटना पड़ा.
बांग्लादेश में हिंसा के बीच तख्तापलट हो गया है. प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पद से इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफे के बाद शेख हसीना ने बांग्लादेश भी छोड़ दिया है. बताया जा रहा है कि शेख हसीना दिल्ली आ सकती हैं. उनके साथ उनकी बहन शेख रेहाना भी हैं.
बांग्लादेश के आर्मी चीफ वकार-उज-जमान ने अंतरिम सरकार बनने का ऐलान किया है. उन्होंने भीड़ से शांति की अपील भी की है.
शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद प्रदर्शनकारियों ने उनके दफ्तर में भी आग लगा दी है. उनकी पार्टी आवामी लीग के कार्यकर्ताओं को ढूंढ-ढूंढकर मारा जा रहा है. प्रधानमंत्री आवास में भी प्रदर्शनकारियों ने कब्जा कर लिया है.
इससे पहले रविवार को बांग्लादेश में भयंकर हिंसक प्रदर्शन हुए थे. प्रदर्शनकारी शेख हसीना के इस्तीफे की मांग पर अड़े थे. इन प्रदर्शनों में 100 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर है. हिंसा को देखते हुए सरकार ने छुट्टी का ऐलान कर दिया था. इंटरनेट भी बंद कर दिया गया था. साथ ही साथ पूरे देश में सेना को तैनात कर दिया गया था.
हालांकि, शेख हसीना के इस 'तख्तापलट' की स्क्रिप्ट कुछ महीनों पहले ही लिख दी गई थी. जब जनवरी में शेख हसीना पांचवीं बार प्रधानमंत्री बनी थीं, उससे पहले से ही उनका विरोध शुरू हो गया था. इसके बाद आरक्षण को लेकर छात्रों ने प्रदर्शन किया. इसी प्रदर्शन ने 15 साल से सत्ता पर काबिज शेख हसीना को पद से हटने पर मजबूर कर दिया.
विवादित चुनावों में जीत

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