
कैसे एक 'मासूम' बच्चे की नफरत से खड़ा हुआ हमास? इजरायल का खात्मा ही है मकसद
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फिलिस्तीनी आतंकी गुट हमास के इजराइल पर हमला के बाद से माहौल गर्म है. इस हमले ने इजराइल को हिलाकर रख दिया है. हालांकि अब इजरायल की ओर से भी जवाबी कार्रवाई जारी है. लेकिन बड़ा सवाल है कि ये हमास कहां से और क्यों आया और इसे किसने बनाया था.
बीते दिन फिलिस्तीनी आतंकी गुट हमास ने इजराइल पर हमला कर 300 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है. हमास ने इजराइल पर एक के बाद एक 5 हजार रॉकेट दागकर तबाही मचा दी. यूं तो हमास और इजराइल के बीच का संघर्ष कोई नया नहीं है लेकिन शनिवार को किए गए हमले ने पूरे इजराइल को हिलाकर रख दिया है. सवाल है कि आखिरी हमास है क्या? ऐसे में ये बता देना जरूरी है कि ये बर्बर आतंकी संगठन ऐसे इंसान के दिमाग की उपज है जिसके दिल में बचपन से ही इजरायल के लिए जहर भर गया था. जी हां सही पढ़ा आपने.
हमास की कहानी 1948 के कब्जे के बाद इजरायली सेना द्वारा नष्ट कर दिए गए एक छोटे फिलिस्तीनी गांव अल-जुरा में पैदा हुए शेख अहमद यासीन से जुड़ी है. 1936 में पैदा हुए यासीन को 12 साल की उम्र में अल-जुरा पर बुलडोजर चल जाने के चलते अपने परिवार के साथ गाजा पट्टी में शिफ्ट होना पड़ा. व्हील चेयर पर चलने वाले मासूम यसीन के मन ने उसी समय से इजरायल के लिए नफरत के बीज पनप गए. बाद में ये शेख अहमद यासीन ही था जिसने हमास की नींव रखी.
मिस्र में पढ़ाई की और गाजा में बना नेता
1959 में, यासिन ने मिस्र के ऐन शम्स विश्वविद्यालय में दाखिला लिया, लेकिन पैसों की दिक्कत के चलते उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी. गाजा लौटने पर, वह मिस्र की मुस्लिम ब्रदरहुड शिक्षाओं से प्रभावित हो गए. इस्लामी अध्ययन और अरबी शिक्षा के प्रति यासीन के लगाव ने उसे गाजा में जाना माना एक धार्मिक नेता बना दिया. यहां तक भी ठीक था लेकिन किसे पता था कि यासीन अब क्या करने वाला है.
अहमद यासीन ने क्यों बनाया हमास?
1983 में, शेख यासीन को गाजा में इजरायली सेना ने हिरासत में ले लिया. कथित तौर पर उसपर चुपचाप संगठन बनाने और हथियार रखने के लिए 13 साल की जेल की सजा मिली. दो साल की सजा के बाद, उन्हें कैदी विनिमय (प्रिजनर एक्सचेंज) में रिहा कर दिया गया. बचपन से इजरायल के लिए मन में जहर पाले यासीन ने 1987 में गाजा स्थित मुस्लिम ब्रदरहुड का नेतृत्व करते हुए हमास की स्थापना की. हमास की स्थापना सीधे- सीधे इजराइल को खदेड़ने और उखाड़ फेंकने के उद्देश्य से की गई थी. हमास और पूरे फिलिस्तीन द्वारा पूरे देश पर कब्जा करने के लिए हमलावर के रूप में देखा जाने लगा.

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