
कुमार विश्वास से लेकर कंचना यादव तक... जानिए यूजीसी विवाद पर किसने क्या कहा
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यूजीसी के नए नियमों के लागू होने के साथ ही विवाद गहरा गया है. सड़क से सोशल मीडिया तक संग्राम छिड़ गया है. इसे लेकर लोगों के बयान आ रहे हैं, कवि कुमार विश्वास से लेकर किसान नेता राकेश टिकैत तक ने सवाल उठाया तो आरजेडी की प्रवक्ता कंचना यादव अलग लाइन पर दिख रही है.
देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव खत्म करने के लिए विश्विद्यालय अनुदान आयोग ने अपने मौजूदा नियमों को और भी सख़्त किया है. यूजीसी के नए नियम लागू होने के बाद सियासत गर्मा गई है. सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक विरोध हो रहे हैं.
शिक्षण संस्थानों में भेदभाव ख़त्म करने के लिए यूजीसी ने जिन नए नियमों का एलान किया है उन्हें लेकर विरोध तेज होता हो रहा है. कवि से लेकर राजनेता तक पक्ष और विपक्ष में अपनी आवाज उठा रहे हैं.
कवि कुमार विश्वास और शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी यूजीसी मामले पर सख्त टिप्पणी की तो आरजेडी की प्रवक्ता कंचना यादव नए नियमों के समर्थन में खड़ी नजर आ रही हैं.यूजीसी विवाद पर सियासी संग्राम छिड़ गया है. जानिए यूजीसी के नए नियमों पर किसकी क्या राय है...
मैं सवर्ण हूं, मेरा रौंया रौंया उखाड़ लो-कुमार विश्वास यूजीसी विवाद पर कवि कुमार विश्वास ने अपनी सख्त नाराजगी जाहिर की है. स्व. रमेश रंजन मिश्र द्वारा रचित कविता की चार पंक्तियां साझा करते हुए कवि कुमार विश्वास ने मांग की है कि यूजीसी अपने नियम वापस ले.उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा-चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा 'सवर्ण' हूं मेरा, रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा ..' (स्व० रमेश रंजन मिश्र). यह लिखने के बाद कुमार विश्वास ने लिखा कि यूजीसी रोलबैक. इस तरह से उन्होंने अपनी नाराजगी को जाहिर करते हुए नए नियमों को वापस लेने की मांग की है.
दोष और भेदभाव कैसे होगा तय-प्रियंका चतुर्वेदी शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने यूजीसी के इन नियमों पर कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि कैंपस में किसी भी तरह का जाति आधारित भेदभाव गलत है और भारत में कई छात्रों ने इसके गंभीर परिणाम पहले ही झेले हैं, लेकिन क्या कानून समावेशी नहीं होना चाहिए और सभी को सुरक्षा की गारंटी नहीं देनी चाहिए? कानून के लागू करने में यह भेदभाव क्यों?”
उन्होंने आगे इन नियमों के दुरुपयोग से बचाव के प्रावधानों की कमी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि झूठे मामलों की स्थिति में क्या होगा? प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि दोष कैसे तय किया जाएगा? भेदभाव को कैसे परिभाषित किया जाएगा- शब्दों से, व्यवहार से या धारणा से? कानून को लागू करने की प्रक्रिया सभी के लिए साफ, स्पष्ट और निष्पक्ष होनी चाहिए. इसलिए कैंपस में नकारात्मक माहौल बनाने के बजाय मैं आग्रह करती हूं कि यूजीसी की अधिसूचना को या तो वापस लिया जाए या जरूरत के अनुसार उसमें संशोधन किया जाए.

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