
कुछ लोगों की लड़ाई से शुरू शिमला मस्जिद विवाद कैसे पॉलिटिक्स का अखाड़ा बन गया?
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हिमाचल प्रदेश के शिमला में अवैध मस्जिद निर्माण ढहाने की मांग को लेकर बवाल हो रहा है. एक दिन पहले ही हिंदू संगठनों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया था और सड़कों पर हंगामा काटा था. बीजेपी कह रही है कि मुस्लिम वोट के नुकसान के डर से कांग्रेस सरकार अवैध निर्माण नहीं हटा रही. कांग्रेस कहती है कि मामला कोर्ट में है. जो फैसला आएगा, वैसे ही कार्रवाई होगी.
हिमाचल प्रदेश के शिमला में संजौली इलाके की मस्जिद को लेकर विवाद थम नहीं रहा है. पिछले 10 दिन से मस्जिद को अवैध बताकर विरोध-प्रर्दशन किया जा रहा है. स्थानीय व्यापारियों ने ऐलान किया कि है कि वे आज (गुरुवार) अपनी दुकानें-प्रतिष्ठान बंद रखेंगे. इस पूरे मसले पर राजनीति भी गरमा गई है. बीजेपी लगातार सत्तारूढ़ कांग्रेस को घेर रही है. बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस अवैध मस्जिद को छूने से डरती है. जबकि कांग्रेस का कहना है कि कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं, इसलिए बीजेपी मस्जिद मुद्दे को जबरन तूल दे रही है. आइए जानते हैं, क्या है पूरा मामला?
दरअसल, शिमला के संजौली में विवादित मस्जिद को गिराने की मांग को लेकर हिंदू संगठन सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. बुधवार को पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए लाठीचार्ज कर दिया. इसके विरोध में गुरुवार को स्थानीय व्यापारी संगठन ने शिमला बंद का आह्वान किया है. व्यापार मंडल ने आज सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक दुकानें बंद रखने का आह्वान किया. बंद का खासा असर देखने को मिला है. कारोबारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे हैं.
पहले इस पूरे विवाद के बारे में जान लीजिए. दरअसल, शिमला के संजौली में जो 5 मंजिला मस्जिद बनाई गई है. वहां पुरानी छोटी मस्जिद की जगह एक अवैध इमारत खड़ी कर दी गई है. आरोप है कि इस मस्जिद को बिना किसी मंजूरी के 5 मंजिल तक बनाया गया है. इस मस्जिद का निर्माण 2009 में शुरू हो गया था और इसे लेकर 2010 में विवाद शुरू हो गया. विवाद होने के 2 साल बाद 2012 में वक्फ बोर्ड ने मस्जिद बनाने की मंजूरी दी थी. नगर निगम की आपत्ति पर 2013 में एक अन्य व्यक्ति ने मस्जिद की ओर से एक मंजिल का प्रस्तावित नक्शा निगम में दिया और 2018 तक बिना वैध मंजूरी के 5 मंजिला मस्जिद बना डाली. लोगों का कहना है कि जब शिमला में साढ़े तीन मंजिल से ज्यादा किसी भी इमारत के निर्माण पर सख्त प्रतिबंध है तो फिर शिमला के संजौली इलाके में सरकारी जमीन पर पांच मंजिला अवैध मस्जिद का निर्माण कैसे हुआ और अब जब सरकार को ये पता चल गया कि ये मस्जिद गैर-कानूनी तरीके से बनाई गई है तो सरकार इसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है?
वक्फ बोर्ड ने भी माना- दो मंजिलें अवैध बनीं
इस बारे में शिमला वक्फ बोर्ड ने भी माना है कि संजौली में बनी मस्जिद की दो मंजिलें अवैध हैं. यह मामला कई सालों से शिमला के नगर निगम कमिश्नर कोर्ट में चल रहा है. वक्फ बोर्ड ने पूरी मस्जिद को अपने अधीन ले लिया है. अवैध कब्जे को हटा दिया गया है. इसे बाहरी राज्य के कुछ मुस्लिम समुदाय की ओर से किया गया था. यहां जो इमाम तैनात थे, उन्हें हटा दिया है. अब बाहरी लोगों के रहने पर भी रोक लगा दी है.

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