
कर्नाटक CM की कुर्सी के लिए सिद्धारमैया-शिवकुमार ने चला दांव, अब मुश्किल में कांग्रेस
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कर्नाटक में बड़ी जीत के बाद कांग्रेस अब इस प्रश्न में उलझी दिख रही है कि सीएम किसे बनाएं. असल में जहां सिद्धारमैया वरिष्ठ और अनुभवी उम्मीदवार हैं तो वहीं डीके शिवकुमार ने तीन सालों में अपनी उपयोगिता को सिद्ध किया है. राजस्थान में कांग्रेस पहले ही नेतृत्व की समस्या से जूझ रही है, ऐसा वह कर्नाटक में नहीं चाहती है. इसलिए दो उम्मीदवारों में से एक चुनाव के यक्ष प्रश्न में फंस गई है.
कर्नाटक में कांग्रेस ने भले ही बड़ी जीत दर्ज कर ली है, लेकिन अब भारत के इस दक्षिणी राज्य का सीएम कौन होगा, इस सवाल के सबसे सटीक जवाब को खोजने में उसकी पेशानी पर बल पड़े जा रहे हैं. जनता ने जिस तरीके से यहां कांग्रेस को स्पष्ट जनादेश दिया है, उसके बाद इस जीत के दो दावेदार सामने हैं. सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों ने मुख्यमंत्री पद के लिए मजबूत दावेदारी रखते हैं. लिहाजा इस मुद्दे का समाधान के लिए पार्टी आलाकमान को भेजा गया है.
रविवार को बुलाई गई निर्वाचित विधायकों की मीटिंग चुनावी परिणाम की घोषणा होने के बाद, रविवार शाम बेंगलुरु के होटल में एक मीटिंग बुलाई गई. इस मीटिंग में कांग्रेस विधायक दल के 135 सदस्य शामिल हुए थे. बैठक में एक लाइन का प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें कहा गया कि " विधायक दल का नया नेता कौन होगा इसका निर्णय कांग्रेस अध्यक्ष करेंगे. इस प्रस्ताव के बाद उम्मीद है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे दिल्ली में कर्नाटक नेतृत्व के मुद्दे पर निर्णय लेने से पहले सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से सलाह-मशविरा करेंगे. हालांकि चुनाव जीतने के बाद यह पहला मौका था, जब नव निर्वाचित विधायक एक साथ बैठे थे. सीएलपी की बैठक अपने तय समय से दो घंटे पहले ही शुरू हो गई थी. दूसरी ओर 'लीडर कौन' वाले सवाल का समाधान करने के लिए सिद्धारमैया, शिवकुमार, रणदीप सिंह सुरजेवाला और केसी वेणुगोपाल एक अलग कक्ष में मंत्रणा कर रहे थे.
कर्नाटक में सिद्धारमैया बनाम डीके शिवकुमार इस जीत के बाद कर्नाटक में कांग्रेस सिद्धारमैया बनाम शिवकुमार वाले प्रश्न से जूझ रही है. कहा जा रहा है कि सिद्धारमैया ने सीएम बनने के लिए अपनी योग्यताएं गिनाई हैं और विधायक दल का नेता चुने जाने को लेकर जोर दिया है. उन्होंने कहा है कि विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने भाजपा सरकार के खिलाफ अथक लड़ाई लड़ी, जिसका अब फिल मिला है. बतौर सीएम एक और कार्यकाल पानो को लेकर उनके पास अनुभव और लोकप्रियता तो हैं ही, साथ ही वह वरिष्ठ भी हैं. इसके अलावा यह उनका आखिरी मौका भी होगा.
वहीं दूसरी ओर, शिवकुमार ने कहा कि 'केपीसीसी अध्यक्ष के रूप में उन्होंने 2018 में जब सिद्धारमैया को आगे लेकर चल रही कांग्रेस की हार हुई तो उन्होंने राज्य में फिर से कांग्रेस के जनाधार का निर्माण किया है. उन्होंने यह भी तर्क दिया है कि आठ बार के विधायक होने के नाते, वह सीएम बनने की सभी योग्यताएं रखते हैं. '

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