
कर्नाटक में कांग्रेस का वह फार्मूला जो उत्तर भारत में बन सकता है गेम चेंजर
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कर्नाटक में शानदार चुनावी जीत के बाद, कांग्रेस अब मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे चुनावी राज्यों में फ्रंटफुट पर खेलती हुई नजर आएगी. कर्नाटक में जिन मुद्दों को पार्टी ने प्रमुखता से लोगों के सामने रखा था, उनमें से कुछ का इस्तेमाल वह उत्तर भारत में भी कर सकती है.
नरेंद्र मोदी और अमित शाह की कार्यशैली से सीख लेते हुए, कांग्रेस ने कर्नाटक में शानदार चुनावी जीत के तुरंत बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे चुनावी राज्यों की तैयारी शुरू कर दी है. दरअसल, 2014 के बाद बीजेपी में एक अलग कार्यशैली विकसित हुई जिसके तहत, किसी भी राज्य के चुनावी नतीजे घोषित होने के तुरंत बाद पार्टी दूसरे राज्यों पर फोकस करना शुरू देती है. प्रधानमंत्री मोदी के साथ मिलकर अध्यक्ष के रूप में अमित शाह ने 2014-2020 तक इस कार्यशैली के तहत शानदार परिणाम दिए. इसके तहत, चुनावी राज्यों में पार्टी अपनी तैयारी कम से कम छह महीने पहले शुरू कर देती है.
कांग्रेस के पास इस साल नवंबर-दिसंबर में होने वाले राजस्थान और छत्तीसगढ़ चुनाव में सत्ता को बचाए रखने की चुनौती है जबकि मध्य प्रदेश पर फिर से कब्जा करने का लक्ष्य भी पार्टी ने तय कर रखा है. मध्य प्रदेश में उसने 2018 में जीत हासिल की थी लेकिन 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के 22 विधायकों ने पाला बदल लिया जिसके बाद कमलनाथ सरकार गिर गई.
कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने 2024 के आम चुनावों से पहले चुनावी राज्यों में 'कर्नाटक टेम्पलेट' को दोहराने का फैसला किया है. मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के लिए कांग्रेस ने जो योजना तैयार की है उसमें स्थानीय रणनीति, सकारात्मक अभियान, मुफ्त उपहार, टिकटों का जल्द वितरण और कांग्रेस की विचारधारा पर जोर देना जैसी प्रमुख विशेषताएं शामिल हैं. इन्ही विशेषताओं के बल पर कांग्रेस कर्नाटक चुनाव में भी मैदान में उतरी थी.
रविवार को कांग्रेस के चार पर्यवेक्षक कुलदीप राठौर, अर्जुन मोढवाडिया, सुभाष चोपड़ा और प्रदीप टम्टा मौजूद थे जो क्रमशः हिमाचल प्रदेश, गुजरात, दिल्ली और उत्तराखंड के प्रमुख नेताओं में शुमार हैं. मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रमुख प्रमुख कमलनाथ और कांग्रेस महासचिव जय प्रकाश अग्रवाल की उपस्थिति में एक लंबी बैठक हुई, जिसमें पार्टी नेताओं ने जल्द से जल्द एक चुनावी घोषणापत्र तैयार करने और युवाओं (50 साल से कम उम्र के) को अधिक से अधिक टिकट देने का फैसला किया. कांग्रेस ने 2021 में अपने उदयपुर मंथन सत्र में 50 साल से कम उम्र वालों को 50 फीसदी टिकट देने का वादा किया था.
38 सेकंड का एक छोटा सा वीडियो कांग्रेस हलकों में प्रसारित किया जा रहा है. इसमें बजरंग बली शैली का एक करैक्टर भगवान राम को बता रहा है कि कर्नाटक में काम पूरा हो गया है. मास्टर को अपने सबसे उत्साही भक्त कमलनाथ की मदद करने के लिए कहते हुए सुना जा सकता है. कमलनाथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष होने के साथ-साथ कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद का चेहरा भी हैं. संयोग से, नाथ हनुमान भक्त भी हैं.
कमलनाथ ने अपने निर्वाचन क्षेत्र छिंदवाड़ा में हनुमान की 101 फीट ऊंची प्रतिमा बनवाने में सक्रिय भूमिका निभाई थी, जहां से वह दस बार सांसद और विधानसभा सदस्य चुने गए. यह देश की सबसे ऊंची हनुमान प्रतिमा है. नाथ ने कहा था, "छिंदवाड़ा हनुमान की मूर्ति दिल्ली के छतरपुर में स्थित मूर्ति से 8 इंच लंबी है. हनुमान जी के प्रति अपनी आस्था की वजह से मैंने यह प्रतिमा स्थापित करवाई.'

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