
कनाडा से गोल्डी बराड़ और तिहाड़ जेल से लॉरेंस बिश्नोई... ऐसे जुर्म का साम्राज्य चलाती है गैंगस्टर्स की ये जोड़ी
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वो भले ही जेल में बंद हो, लेकिन जेल की सलाखें उसके शातिर इरादों को कैद नहीं कर पाती. वो जेल में बैठकर साजिश रचता है. बाहर उसके गुर्गे उस साजिश को अंजाम तक पहुंचाते हैं. वो वारदात की प्लानिंग करता है और देश के किसी भी कोने में उसके शूटर गोलियां बरसाते हैं. ये कहानी है दो कुख्यात अपराधियों की.
Lawrence Bishnoi Goldie Brar Nexus: जुर्म की दुनिया में लॉरेंस बिश्नोई का नाम ऊंचे मकाम पर है. वो देश का सबसे बड़ा गैंगस्टर बनने की राह पर है. वो भले ही जेल में बंद हो, लेकिन जेल की सलाखें उसके शातिर इरादों को कैद कर पाने में नाकाम हो जाती हैं. वो जेल में बैठकर साजिश रचता है. बाहर उसके गुर्गे उसे साजिश को अंजाम तक पहुंचाते हैं. वो वारदात की प्लानिंग करता है और देश के किसी भी कोने में उसके शूटर गोलियां बरसाते हैं. इस काम में उसका सबसे बड़ा राजदार और साथी है गैंगस्टर गोल्डी बराड़, जो कनाडा में बैठकर लॉरेंस का काम संभालता है. वो उसके इशारे पर किसी भी संगीन से संगीन वारदात को अंजाम दे सकता है. आइए आपको बताते हैं, इस कुख्यात अपराधी जोड़ी की क्राइम कुंडली.
ऐसे चलता है गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का साम्राज्य गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ने अपना जाल बट्टा कुछ ऐसे फैलाया कि अब वो जेल के अंदर रहे या फिर बाहर, उसे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता. कहने का मतलब ये कि वो जेल में बैठे-बैठे ही बड़ी आसानी से जो चाहता है, वो करता है. जेल में बैठे-बैठे ही वो अपने दुश्मनों के नाम की सुपारी निकालता है और जेल में बैठे-बैठे ही करोड़ों की वसूली करता है. एनआईए की पूछताछ में उसने अपने काम करने की पूरी मॉडस ऑपरेंडी और उसका एक-एक सच खोल कर रख दिया था.
फोन कॉल पर करोड़ों की उगाही दिल्ली की तिहाड़ जेल के अलावा राजस्थान के भरतपुर, पंजाब के फरीदकोट जेस में रहते हुए भी उसने उत्तर भारत के कारोबारियों करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की. कभी उसने राजस्थान के कारोबारियों से, कभी उसने चंडीगढ़ के कम से कम 10 क्लब मालिकों से, कभी अंबाला के सभी मॉल मालिकों से, कभी शराब कारोबारियों से और कभी दिल्ली और पंजाब के सटोरियों से करोड़ों की उगाही की. जेल में लॉरेंस के गुर्गे ऐसे कारोबारियों और धंधेबाज़ों के नंबर लेकर आते थे, और लॉरेंस के नाम पर जानेवाले एक एक फोन कॉल पर करोड़ों रुपये उसके बताए ठिकाने पर पहुंच जाते थे.
क्रशर मालिकों से वसूली एनआईए सूत्रों की मानें तो गोल्डी बराड़, काला राणा, गुरलाल बराड़ और काला जठेड़ी जैसे गैंगस्टर अक्सर ऐसे नंबर लॉरेंस को मुहैया करवाते रहे हैं. इनमें गुरलाल बराड़ का तो खैर कत्ल हो चुका है, लेकिन बाकी गैंगस्टरों की ओर से ये सिलसिला अब भी जारी है. लॉरेंस ने अपने सिंडिकेट की बारीकियों का खुलासा करते हुए बताया है कि उसका जाल राजस्थान तक फैला हुआ है. वहां के कई क्रशर मालिकों और स्टोन करोबारियों से भी उसके गैंग ने करोड़ों रुपये वसूल किए हैं. लॉरेंस की ओर से गैंगस्टर आनंदपाल के भाई विक्की सिंह और मंजीत सिंह उसके लिए राजस्थान में वसूली करते हैं.
हथियारों की तस्करी लेकिन ये तो रही गैंग की कमाई की बात.. लॉरेंस के गैंग से जुड़े गुर्गे और खुद लॉरेंस सालों से अपने गैंग के लिए हथियारों की तस्करी करता रहा है. उसने कबूला है कि साल 2018 से 2022 तक उसने यूपी के खुर्जा से अपने करीबी गैंगस्टर रोहित चौधरी के मार्फत आर्म्स सप्लायर कुर्बान चौधरी उर्फ शहजाद से हथियारों की मोटी खेप खरीदी थी. इनमें करीब 2 करोड़ रुपये के 25 हथियार शामिल थे. इन हथियारों में 99 एमएम की पिस्टल से लेकर एके 47 जैसे खौफनाक हथियार भी थे, आम लोगों के लिए जिनके इस्तेमाल पर रोक है. लेकिन तस्करी के जरिए लॉरेंस का गैंग ऐसे हर हथियार जुटाता रहा है और तफ्तीश में ये बात साफ हो चुकी है कि पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला के कत्ल में ऐसे हथियारों का इस्तेमाल लॉरेंस गैंग की ओर से किया जा चुका है.
लॉरेंस ने ही गोगी गैंग को दिलाई थी जिगाना पिस्टल एनआईए की पूछताछ में लॉरेंस बिश्नोई का एक-एक सच सामने आ गया था. लॉरेंस ने खुद अपनी जुबान से वो सच कबूल किया था. दिल्ली में जितेंद्र गोगी और टिल्लू ताजपुरिया गैंग के बीच पुरानी दुश्मनी रही है. और इन दोनों गैंग्स में गोगी का गैंग लॉरेंस बिश्नोई के खेमे का गैंग माना जाता है. ऐसे में लॉरेंस ने ये माना है कि साल 2021 में उसी ने अपने साथी गोल्डी बराड के जरिए जितेंद्र गोगी को दो जिगाना पिस्टल दिलवाई थी.

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