
एक लव स्टोरी का दर्दनाक अंत, प्रेमिका के साथ वो 384 घंटे... आफताब-श्रद्धा की पूरी कहानी
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दिल्ली में आकर एक नौजवान इतना बेखौफ है कि इसी दिल्ली में पहले क़त्ल करता है फिर 18 दिनों तक लाश के टुकड़े लेकर पूरी दिल्ली में घूमता रहता है और फिर काम खत्म हो जाने के बावजूद वो दिल्ली से भागता नहीं बल्कि इसी दिल्ली में बेखौफ रहता है. ये कहानी है उस आफताब की, जिसने श्रद्धा का बेरहमी से कत्ल किया था.
देश की राजधानी दिल्ली है. यहां करीब दो करोड़ लोग रहते हैं. देश के सबसे ताक़तवर लोगों का बसेरा भी यहीं है. इन दो करोड़ लोगों की हिफाजत के लिए लगभग 90 हज़ार पुलिसवाले हैं. दिल्ली का ऐसा कोई कोना नहीं जो पुलिसवालों से खाली हो, मगर इन्हीं दो करोड़ लोगों और 90 हज़ार पुलिसवालों को अनदेखा कर एक शख्स बेखौफ दिल्ली भर में घूम-घूमकर पूरे 18 दिनों तक एक लाश के टुकड़ों को फेंकता रहा और किसी को भनक और बू तक नहीं लगी.
दिल्ली का न होकर भी मुंबई से हज़ार किलोमीटर दूर अनजान दिल्ली में आकर एक नौजवान इतना बेखौफ है कि इसी दिल्ली में पहले क़त्ल करता है फिर 18 दिनों तक लाश के टुकड़े लेकर पूरी दिल्ली में घूमता रहता है और फिर काम खत्म हो जाने के बावजूद वो दिल्ली से भागता नहीं बल्कि इसी दिल्ली में बेखौफ रहता है. ये कहानी है उस आफताब की, जिसने श्रद्धा का बेरहमी से कत्ल किया और उसकी लाश के 20 से अधिक टुकड़े किए.
कहानी शुरू होती है मुंबई से
27 साल की श्रद्धा विकास वॉलकर नौकरी की तलाश में पहली बार मुंबई आती है. महाराष्ट्र के पालघर में अपनी मां और भाई को छोड़कर. श्रद्धा के पिता विकास मदन वॉलकर पालघर में इलेक्ट्रॉनिक सामान की एक दुकान और सर्विस का काम करते थे. मदन वॉलकर 2016 से ही अपने परिवार से अलग रह रहे थे. उनके परिवार में बेटी श्रद्धा के अलावा पत्नी सुमन और 23 साल का एक बेटा है. श्रद्धा को मलाड में एक मल्टीनेशनल कंपनी के कॉल सेंटर में नौकरी मिल जाती है.
इसी कॉल सेंटर में 30 साल का आफताब अमीन पूनावाला भी नौकरी कर रहा था. यहीं श्रद्धा और आफताब की पहली बार मुलाकात होती है. करीब 8-9 महीने की मुलाकात के बाद दोनों में प्यार हो जाता है. 2019 की शुरुआत में श्रद्धा और आफताब फैसला करते हैं कि अब वो अलग अलग रहने की बजाए एक साथ लिव इन में रहेंगे. इसके बाद दोनों मलाड में किराए का एक घर ले लेते हैं. श्रद्धा की मां और पिता अब भी पालघर में हैं.
आफताब के साथ लिव इन में रहने लगी थी श्रद्धा

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