
उत्तराखंड सरकार के दावों की 'आजतक' ने खोली पोल, अल्मोड़ा के जंगलों में शवदाह की अपनी रिपोर्ट पर कायम
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हमारी पड़ताल में अल्मोड़ा की जमीनी हकीकत उत्तराखंड सरकार के लंबे-चौड़े दावों से काफी अलग है. ऐसे में आजतक अपनी रिपोर्ट पर कायम है. जिसमें 20 मई को हमने बताया था कि अल्मोड़ा में कोविड मरीज़ों के अंतिम संस्कार पारंपरिक श्मशान घाट में होने पर जब ग्रामीणों ने आपत्ति जताई तो फिर जंगल के बीच में अस्थाई श्मशान घाट बनाया गया.
'आजतक' के नए फैक्ट ने उत्तराखंड सरकार के उन तमाम दावों की पोल खोल दी, जिसमें कहा गया कि कोरोना मरीजों के शवों का न तो खुले जंगल में दाह संस्कार हुआ और न ही प्रशासन की गैरमौजूदगी में उन्हें जलाया गया. जबकि हमारी रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में कोरोना मरीजों के शवों का खुले जंगल में अंतिम संस्कार किया जा रहा है. जंगल के बीच में ही अस्थाई श्मशान घाट बनाया गया और यहीं बिना किसी सरकारी मदद या प्रशासन की मौजूदगी के परिजनों को खुद ही अपनों को अंतिम विदाई देनी पड़ रही है. स्टोरी के सनसनीखेज होने का आरोप
जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

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