
इसराइल से ज़्यादा खाड़ी देशों पर मिसाइल हमले: ईरान ने रणनीति में क्या बदलाव किया?
BBC
ईरान की रक्षा क्षमताओं में बैलिस्टिक, क्रूज़ और हाइपरसोनिक मिसाइलें शामिल हैं और उसके पास ड्रोन भी हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि उसने इसराइल और खाड़ी देशों के ख़िलाफ़ हमलों की अपनी रणनीति बदल दी है.
बीबीसी अरबी के एक सर्वे के अनुसार ईरान ने पिछले साल इसराइल के ख़िलाफ़ 12 दिन के युद्ध की तुलना में अभी चल रही जंग के दौरान खाड़ी क्षेत्र की तरफ़ ज़्यादा मिसाइलें दागी हैं.
सऊदी अरब, क़तर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बहरीन और कुवैत ने जो आंकड़े जारी किए हैं, उनके अनुसार, 28 फ़रवरी से 4 मार्च तक खाड़ी देशों पर दागी गई मिसाइलों की संख्या 550 से ज़्यादा है. ओमान ने अपने यहां मिसाइल और ड्रोन हमलों की संख्या नहीं बताई है. दूसरी तरफ़ वॉशिंगटन और इसराइल ने ईरान पर हज़ारों बम गिराए हैं.
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने खाड़ी देशों पर इन हमलों के लिए माफ़ी मांगी है और यह वादा किया है कि अगर उनकी धरती का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं किया जाएगा तो ईरान भी उन पर हमला नहीं करेगा.
बीबीसी के वर्ल्ड अफ़ेयर्स एडिटर जॉन सिंपसन का कहना है कि पेज़ेश्कियान ने वैसे तो शांति का संदेश दिया है लेकिन सवाल यह है कि क्या उनकी बात को ईरान के नेतृत्व का स्टैंड माना जा सकता है?
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ईरान की रक्षा क्षमताओं में बैलिस्टिक, क्रूज़ और हाइपरसोनिक मिसाइलें शामिल हैं और उसके पास ड्रोन भी हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि उसने इसराइल और खाड़ी देशों के ख़िलाफ़ हमलों की अपनी रणनीति बदल दी है.
तो हमें इन मिसाइलों के बारे में क्या मालूम है? इसराइल के ख़िलाफ़ पिछली जंग के मुक़ाबले इस बार क्या अलग है और ईरान अपने हथियारों पर किस हद तक निर्भर रह सकता है?

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